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Astro Tips: कुंडली में सूर्य को मजबूत करने के लिए करें ये काम, आत्मविश्वास में होगी वृद्धि

Wed, 30 Apr 2025 01:40 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सूर्य को सभी ग्रहों में राजा का दर्जा हासिल है और वह आत्मा, इच्छाशक्ति, पिता और मान-सम्मान के कारक ग्रह है। कुंडली में उनकी स्थिति सही होने पर व्यक्ति के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, साथ ही उसका समाज में प्रभाव भी बढ़ता है।
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सूर्य को सभी ग्रहों में राजा का दर्जा हासिल है और वह आत्मा, इच्छाशक्ति, पिता और मान-सम्मान के कारक ग्रह है। - फोटो : adobe stock
Surya Chalisa Benefits: ज्योतिष शास्त्र में मौजूद सभी ग्रहों का खास असर व्यक्ति के जीवन पर पड़ता है। लेकिन इन सभी में सूर्य के प्रभाव को अधिक महत्वपूर्ण माना गया है। दरअसल, सूर्य को सभी ग्रहों में राजा का दर्जा हासिल है और वह आत्मा, इच्छाशक्ति, पिता और मान-सम्मान के कारक ग्रह है।

कुंडली में उनकी स्थिति सही होने पर व्यक्ति के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, साथ ही उसका समाज में प्रभाव भी बढ़ता है। परंतु स्थिति कमजोर होने से व्यक्ति को मानसिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं झेलनी पड़ती हैं, इतना ही नहीं आत्मविश्वास में कमी भी महसूस होती हैं, जिससे सभी कार्य प्रभावित होने लगते हैं।

ऐसे में कुंडली में सूर्य की स्थिति को मजबूत करने के लिए नियमित रूप से भगवान सूर्य को अर्घ्य देने की सलाह दी जाती हैं। इस दौरान सूर्य चालीसा का पाठ करना और भी कल्याणकारी है। इसके प्रभाव से सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं और अपनी कृपा बरसाते हैं। ऐसे में आइए इस शक्तिशाली चालीसा के बारे में जानते हैं।
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सूर्य चालीसा - फोटो : Adobe Stock
श्री सूर्य चालीसा
 दोहा
 
कनक बदन कुंडल मकर, मुक्ता माला अंग।
पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के संग।।
 
चौपाई
जय सविता जय जयति दिवाकर, सहस्रांशु सप्ताश्व तिमिरहर।
भानु, पतंग, मरीची, भास्कर, सविता, हंस, सुनूर, विभाकर।
 
विवस्वान, आदित्य, विकर्तन, मार्तण्ड, हरिरूप, विरोचन।
अम्बरमणि, खग, रवि कहलाते, वेद हिरण्यगर्भ कह गाते।
 
सहस्रांशु, प्रद्योतन, कहि कहि, मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि।
अरुण सदृश सारथी मनोहर, हांकत हय साता चढ़ि रथ पर।
 
मंडल की महिमा अति न्यारी, तेज रूप केरी बलिहारी।
उच्चैश्रवा सदृश हय जोते, देखि पुरन्दर लज्जित होते।
 
मित्र, मरीचि, भानु, अरुण, भास्कर, सविता,
सूर्य, अर्क, खग, कलिहर, पूषा, रवि,
 
आदित्य, नाम लै, हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै।
द्वादस नाम प्रेम सो गावैं, मस्तक बारह बार नवावै।
 
चार पदारथ सो जन पावै, दुख दारिद्र अघ पुंज नसावै।
नमस्कार को चमत्कार यह, विधि हरिहर कौ कृपासार यह।
 
सेवै भानु तुमहिं मन लाई, अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई।
बारह नाम उच्चारन करते, सहस जनम के पातक टरते।
 
उपाख्यान जो करते तवजन, रिपु सों जमलहते सोतेहि छन।
छन सुत जुत परिवार बढ़तु है, प्रबलमोह को फंद कटतु है।
 
अर्क शीश को रक्षा करते, रवि ललाट पर नित्य बिहरते।
सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत, कर्ण देश पर दिनकर छाजत।
 
भानु नासिका वास करहु नित, भास्कर करत सदा मुख कौ हित।
ओठ रहैं पर्जन्य हमारे, रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे।
 
कंठ सुवर्ण रेत की शोभा, तिग्मतेजसः कांधे लोभा।
पूषा बाहु मित्र पीठहिं पर, त्वष्टा-वरुण रहम सुउष्णकर।
 
युगल हाथ पर रक्षा कारन, भानुमान उरसर्मं सुउदरचन।
बसत नाभि आदित्य मनोहर, कटि मंह हंस, रहत मन मुदभर।
 
जंघा गोपति, सविता बासा, गुप्त दिवाकर करत हुलासा।
विवस्वान पद की रखवारी, बाहर बसते नित तम हारी।
 
सहस्रांशु, सर्वांग सम्हारै, रक्षा कवच विचित्र विचारे।
अस जोजजन अपने न माहीं, भय जग बीज करहुं तेहि नाहीं।
 
दरिद्र कुष्ट तेहिं कबहुं न व्यापै, जोजन याको मन मंह जापै।
अंधकार जग का जो हरता, नव प्रकाश से आनन्द भरता।
 
ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही, कोटि बार मैं प्रनवौं ताही।
मन्द सदृश सुतजग में जाके, धर्मराज सम अद्भुत बांके।
 
धन्य-धन्य तुम दिनमनि देवा, किया करत सुरमुनि नर सेवा।
भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों, दूर हटत सो भव के भ्रम सों।
 
परम धन्य सो नर तनधारी, हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी।
अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन, मध वेदांगनाम रवि उदय।
 
भानु उदय वैसाख गिनावै, ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै।
यम भादों आश्विन हिमरेता, कातिक होत दिवाकर नेता।
अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं, पुरुष नाम रवि हैं मलमासहिं।
 
दोहा
 भानु चालीसा प्रेम युत, गावहिं जे नर नित्य।
सुख सम्पत्ति लहै विविध, होंहि सदा कृतकृत्य।।
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सूर्य ग्रह के मंत्र - फोटो : Adobe Stock
सूर्य ग्रह के 12 मंत्र
  • ॐ आदित्याय नमः।
  • ॐ सूर्याय नमः।
  • ॐ रवेय नमः।

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Astro Tips - फोटो : Adobe Stock
  • ॐ पूषणे नमः।
  • ॐ दिनेशाय नमः।
  • ॐ सावित्रे नमः।
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Astro Tips - फोटो : Adobe Stock
  • ॐ प्रभाकराय नमः।
  • ॐ मित्राय नमः।
  • ॐ उषाकराय नमः।
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Astro Tips - फोटो : freepik
  • ॐ भानवे नमः।
  • ॐ दिनमणाय नमः।
  • ॐ मार्तंडाय नमः।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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