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नवरात्रि में क्यों बोया जाता है जौ? क्या है इसका धार्मिक महत्व

Wed, 18 Sep 2019 08:24 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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माता की आराधना के लिए नवरात्रि के नौ दिन बहुत अधिक महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन दिनों में मां के नौ स्वरूपों की पूजा का विधान है। आदि शक्ति की आराधना की जाती है। इस समय जो लोग नवरात्रि व्रत और दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं वह लोग इस दौरान घर में मिट्टी के बर्तनों में ज्वारे यानि जौ बोते है। हम आज आपको यह बताएंगे कि नवरात्रि में जौ क्यों बोए जाते हैं और यह भविष्य को लेकर क्या संकेत देते हैं।
 
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हमारे धर्मग्रन्थों के अनुसार सृष्टि की शुरूआत के बाद पहली फसल जौ कि ही हुई थी, इसलिए जब भी देवी-देवताओं की पूजा की जाती है तो हवन में जौ चढ़ाई जाती है। मान्यता अनुसार नवरात्रि ने जो जौ उगाई जाती है, वह भविष्य से संबंधित कुछ बातों के संकेत मिलते है।  मान्यता अनुसार जौ बोने के पीछे प्रमुख कारण यही है कि जौ अन्न ब्रह्म है और हमें अन्न का सम्मान करना चाहिए। 
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जौ
बोया गया जौ दो तीन दिन में ही अंकुरित हो जाता है, लेकिन अगर यह न उगे तो भविष्य में आपके लिए अच्छे संकेत नहीं है यानि कि आपको कड़ी मेहनत के बाद ही उसका फल मिलेगा। जब जौ का रंग नीचे से आधा पीला और ऊपर से आधा हरा हो इसका मतलब आने वाला साल का आधा समय ठीक रहेगा।
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navratri
वहीं जौ का रंग नीचे से आधा हरा है और ऊपर से आधा पीला हो तो इसका अर्थ है कि साल का शुरूआती समय अच्छे से बीतेगा, लेकिन बाद में आपको परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। अगर आपका बोया हुआ जौ सफेद या हरे रंग में उग रहा है तो यह बहुत ही शुभ माना जाता है। ऐसा अगर होता है तो यह मान लिया जाता है कि, की गयी पूजा सफल हो गयी। आने वाला पूरा साल खुशियों से भरा होगा।
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