शुक्र प्रदोष व्रत की कथा
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यह समाचार सुनकर ब्राह्मण मित्र तुरंत धनिक के घर पहुंचा और शुक्र प्रदोष व्रत करने की सलाह दी। उसने कहा कि धनिक पुत्र को पत्नी सहित पुनः ससुराल भेज दिया जाए। ब्राह्मण की बात मानकर ऐसा ही किया गया। ससुराल पहुंचते ही धनिक पुत्र की तबीयत में सुधार होने लगा और धीरे-धीरे सभी कष्ट दूर हो गए।
इस प्रकार शुक्र प्रदोष व्रत के प्रभाव से धनिक पुत्र का जीवन बच गया। यही कारण है कि इस व्रत के दिन शुक्र प्रदोष की कथा अवश्य पढ़नी या सुननी चाहिए।
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