भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व जन्माष्टमी, भाद्रपद के कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। भगवान कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, यही कारण है कि अष्टमी की तिथि को रात 12 बजे विशेष पूजा-अर्चन के साथ हर वर्ष यह उत्सव मनाया जाता है। ज्योतिषविदों का मानना है कि इस वर्ष अष्टमी तिथि 18 अगस्त को रात 9 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर अगले दिन यानी 19 अगस्त को रात 10 बजे तक रहेगी, ऐसे में 18 अगस्त को कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। भक्त इस दिन अपनी श्रृद्धानुसार, पूजा-पाठ और व्रत रखकर भगवान को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं।
मान्यताओं के अनुसार भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं को सुनना और पढ़ना कई प्रकार की मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला होताहै। पूतना वध की कथा, प्रभु की लीलाओं में काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। पूतना राक्षसी, कंस की दासी थी, जिसे कंस ने भगवान कृष्ण के मारने के लिए गोकुल भेजा था। उसके पास रूप बदलने की शक्ति थी, आइए जानते हैं कि कैसे पूतना ने रूप बदलकर भगवान कृष्ण को मारना चाहा और उसका किस तरह से अंत हुआ?