पितृपक्ष 2020 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
पितृपक्ष के आखिरी दिन यानि अश्विन मास की अमावस्या के दिन भूले बिसरे सभी का श्राद्ध कर सकते हैं। अगर आपको अपने पितरों की तिथि याद है तो उस तिथि के अनुसार पिंडदान करना चाहिए, या फिर अश्विन मास की अमावस्या के दिन श्राद्ध कर सकते हैं, इसलिए इसे सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है।