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Jivitputrika vrat 2020: संतान को हर कष्ट से बचाता है, यह व्रत, जानिए कथा और तिथि

Tue, 01 Sep 2020 01:04 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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जीवित्पुत्रिका 2020 - फोटो : social media
अश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन जीवित्पुत्रिका का व्रत किया जाता है। 2020 में यह व्रत 10 सितंबर को रखा जाएगा। इस व्रत को सुहागन स्त्रियां अपनी संतान को कष्टों से बचाने और लंबी आयु की मनोकामना के लिए करती हैं, इस व्रत को निर्जला किया जाता है। कुछ जगहों पर इसे जितिया या जिउतिया व्रत के नाम से भी जाना जाता है। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में यह व्रत प्रमुखता से रखा जाता है। आइए जानते हैं इस व्रत की पौराणिक कथा
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जीवित्पुत्रिका 2020 - फोटो : social media
जीवित्पुत्रिका व्रत कथा
जब महाभारत का युद्ध हुआ तो अश्वत्थामा नाम का हाथी मारा गया लेकिन चारों तरफ यह खबर फैल गई कि अश्वत्थामा मारा गया। यह सुनकर अश्वत्थामा के पिता द्रोणाचार्य ने शोक में अस्त्र डाल दिए तब द्रोपदी के भाई धृष्टद्युम्न  ने उनका वध कर दिया। इसके कारण अश्वत्थामा के मन में प्रतिशोध की अग्नि जल रही थी। अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए उसने रात्रि के अंधेरे में पांडव समझकर उनके पांच पुत्रों की हत्या कर दी। इसके कारण पांडवों को अत्यधिक क्रोध आ गया, तब भगवान श्री कृष्ण ने अश्वत्थामा से उसकी मणि छीन ली।
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जीवित्पुत्रिका 2020 - फोटो : social media
जिसके बाद अश्वत्थामा पांडवों से क्रोधित हो गया और उत्तरा के गर्भ में पल रहे बच्चे को भी जान से मारने के लिए उसने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया। भगवान श्री कृष्ण इस बात से भलिभांति परिचित थे कि ब्रह्मास्त्र को रोक पाना असंभव है। लेकिन उन्हें पांडवों के पुत्र की रक्षा करना अति आवश्यक था।
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जीवित्पुत्रिका 2020 - फोटो : social media
भगवान श्री कृष्ण ने अपने सभी पुण्यों का फल एकत्रित करके उत्तरा के गर्भ में पल रहे बच्चे को दिया। इसके फलस्वरूप वह उत्तरा के गर्भ में पल रहा बच्चा पुनर्जीवित हो गया। यह बच्चा ही बड़ा होकर राजा परीक्षित बना। उत्तरा के बच्चे के दोबारा जीवित हो जाने के कारण ही इस व्रत का नाम जीवित्पुत्रिका व्रत पड़ा। तब से ही संतान की लंबी उम्र और स्वास्थ्य की कामना के लिए जीवित्पुत्रिका व्रत किया जाता है।
 
 
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