इस टोकरी में रोजमर्रा की जरूरी वस्तुएं जैसे अनाज, तिल, गुड़, वस्त्र, दक्षिणा, आदि रखी जाती हैं।
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दान की टोकरी क्यों बनाई जाती है?
सर्वपितृ अमावस्या के दिन दान का विशेष महत्व होता है, क्योंकि यह दिन पितरों को विदाई देने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का अंतिम अवसर होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितरों को प्रसन्न करने का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम दान है। यही कारण है कि इस दिन विशेष रूप से दान की टोकरी तैयार करने की परंपरा है।
इस टोकरी में रोजमर्रा की जरूरी वस्तुएं जैसे अनाज, तिल, गुड़, वस्त्र, दक्षिणा, आदि रखी जाती हैं और श्रद्धा भाव से इसे किसी ब्राह्मण, मंदिर या ज़रूरतमंद को अर्पित किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह दान पितरों तक पहुंचता है और उनकी आत्मा को तृप्त करता है। बदले में वे अपने वंशजों को सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति का आशीर्वाद देते हैं। इस परंपरा से न सिर्फ पितृ कृपा मिलती है, बल्कि यह परिवार की उन्नति और कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त करती है।