अकाल मृत्यु वालों का श्राद्ध
वाहन दुर्घटना, सांप के काटने से, जहर के खाने से अकाल मृत्यु के कारण जिसकी मृत्यु हुई हो उसका श्राद्ध चतुर्दशी तिथि में करना चाहिए। चतुर्दशी तिथि में मरने वालों का श्राद्ध चतुर्दशी में नहीं करना चाहिए। किसी व्यक्ति की मृत्यु पूर्णिमा को हो तो उसका श्राद्ध भाद्र शुक्ल पूर्णिमा को करना चाहिए। इसमें दादा-दादी, परदादी और नाना-नानी का श्राद्ध करना चाहिए।
भरणी का श्राद्ध
28 सितंबर को चतुर्थी तिथि दिन शुक्रवार को भरणी नक्षत्र होने के कारण भरणी का श्राद्ध कहा जाता है। भरणी नक्षत्र में पितरों का पार्वण श्राद्ध करने का विशेष महत्व है। नवमी तिथि को सौभाग्यवती स्त्रियों का श्राद्ध किया जाता है।
संन्यासियों का श्राद्ध
संन्यासियों का श्राद्ध पार्वण पद्धति से द्वादशी में किया जाता है। भले ही इनकी मृत्यु किसी भी तिथि को हुई हो, जिस किसी की मृत्यु की तिथि का ज्ञान न हो उसका श्राद्ध अमावस्या को करना चाहिए।
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