चंद्रमा देवताओं के सामान ही पूजनीय माने गए हैं। चंद्रमा के जन्म की कहानी को लेकर पुराणों में अलग-अलग व्याख्या है। ज्योतिष और वेदों में चंद्र को मन का कारक कहा जाता है। वैदिक साहित्य में सोम का स्थान भी प्रमुख देवताओं में मिलता है। अग्नि, सूर्य और इंद्र देवों के समान ही सोम की स्तुति के मंत्रों की रचना भी ऋषियों द्वारा की गई है। मत्स्य और अग्नि पुराण के मुताबिक जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि रचने का विचार किया तो सबसे पहले उन्होंने अपने संकल्प से मानस पुत्रों की रचना की। उनमें से एक मानस पुत्र ऋषि अत्रि की शादी ऋषि कर्दम की कन्या अनुसुइया से हुई जिसे से दुर्वासा, दत्तात्रेय और सोम तीन बेटे हुए। सोम चंद्र का ही एक नाम है।
नहीं बन पा रहा है धन योग? जानिए इसका सही समाधान विश्व-प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों से केवल 251 रुपये में। अभी आर्डर करें। (विज्ञापन)