फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दुर्गा सप्तशती पाठ: शारदीय नवरात्रि में सप्तशती पाठ का महत्व, जानें सही विधि और इससे मिलने वाले लाभ

Tue, 13 Oct 2026 01:30 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दुर्गा सप्तशती के नियमित पाठ से आत्मविश्वास बढ़ता है और मन को शांति मिलती है। आइए जानते हैं दुर्गा सप्तशती क्या है, इसके पाठ की विधि और इससे मिलने वाले लाभ।
विज्ञापन
1 of 5
दुर्गा सप्तशती का पाठ करते समय न करें ये गलतियां - फोटो : AI
शारदीय नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की उपासना के साथ धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना भी विशेष फलदायी माना जाता है। इनमें दुर्गा सप्तशती का स्थान महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि नवरात्रि में श्रद्धापूर्वक इस ग्रंथ का पाठ करने से मन में सकारात्मक विचार आते हैं और व्यक्ति को मानसिक स्थिरता व आत्मविश्वास प्राप्त होता है। हालांकि, पाठ शुरू करने से पहले पूजा स्थल की व्यवस्था, श्लोकों के उच्चारण और पाठ के पारंपरिक क्रम का ध्यान रखना आवश्यक माना गया है। आइए जानते हैं दुर्गा सप्तशती से जुड़ी प्रमुख बातें, इसके पाठ की विधि और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मिलने वाले लाभ।
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 5
दुर्गा सप्तशती क्या है? - फोटो : adobe stock
दुर्गा सप्तशती क्या है?
दुर्गा सप्तशती हिंदू धर्म का एक प्रसिद्ध धार्मिक ग्रंथ है, जो मार्कंडेय पुराण के अंतर्गत आता है। इसे देवी माहात्म्य और चंडी पाठ के नाम से भी जाना जाता है। इस ग्रंथ में कुल 13 अध्याय हैं और लगभग 700 श्लोक संकलित हैं। इसी वजह से इसे सप्तशती कहा जाता है। इसमें मां दुर्गा की शक्ति, महिमा और विभिन्न असुरों के साथ उनके युद्ध का वर्णन मिलता है। यह ग्रंथ बुराई पर अच्छाई की विजय और देवी की दिव्य शक्ति का संदेश देता है।
विज्ञापन

3 of 5
दुर्गा सप्तशती पाठ करने के नियम - फोटो : adobe
दुर्गा सप्तशती पाठ करने के नियम
1. पूजा स्थल की सफाई:
पाठ शुरू करने से पहले पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें। आवश्यक सामग्री पहले से व्यवस्थित कर लें, ताकि पूजा के दौरान किसी तरह की जल्दबाजी न हो।
2. स्नान और स्वच्छ वस्त्र: पाठ से पहले स्नान करके साफ कपड़े पहनें। इसके बाद स्वच्छ आसन पर बैठकर मां दुर्गा का ध्यान करें और श्रद्धापूर्वक पूजा आरंभ करें।
3. निर्धारित क्रम का पालन: पारंपरिक विधि में दुर्गा सप्तशती के पाठ से पहले दुर्गा कवच, अर्गला स्तोत्र और कीलक स्तोत्र पढ़ने की परंपरा है। इसके बाद निर्धारित क्रम में 13 अध्यायों का पाठ किया जाता है।

4 of 5
दुर्गा सप्तशती पाठ करने के नियम - फोटो : freepik
4. दीपक और आरती: मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं। पाठ के दौरान देवी का स्मरण करें। पाठ पूरा होने पर आरती करें और पूजा में हुई भूलों के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
5. भोग और प्रसाद: पूजा के बाद मां दुर्गा को फल, मिठाई या बताशे का भोग लगाएं। इसके बाद प्रसाद बांटें और परिवार की सुख-शांति व समृद्धि की कामना करें।
6. शुद्ध उच्चारण: पाठ करते समय श्लोकों का सही उच्चारण करने का प्रयास करें। जल्दबाजी से बचें और अपनी पारिवारिक परंपरा या गुरु के निर्देशों के अनुसार पूजा विधि अपनाएं।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
दुर्गा सप्तशती पाठ के लाभ - फोटो : adobe
दुर्गा सप्तशती पाठ के लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से कई आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं।
मानसिक शांति: नियमित पाठ और देवी का ध्यान मन को एकाग्र करने में सहायक हो सकता है।
आत्मविश्वास: मां दुर्गा की शक्ति और पराक्रम की कथाएं कठिन परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा देती हैं।
सकारात्मकता: पूजा-पाठ से व्यक्ति को आशावादी दृष्टिकोण बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
सुख-समृद्धि: श्रद्धालु परिवार की खुशहाली और जीवन की बाधाओं से मुक्ति की कामना के लिए पाठ करते हैं।
आध्यात्मिक उन्नति: नियमित उपासना से व्यक्ति अपनी आस्था और आध्यात्मिक साधना को मजबूत कर सकता है।
इस प्रकार, शारदीय नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ मां दुर्गा की आराधना का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।
 

शारदीय नवरात्रि 2026 के 9 रंग: पहले दिन से महानवमी तक जानें नौ दिनों के शुभ रंग


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें