फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नवरात्रि में सात्विक भोजन और फलाहार की परंपरा क्यों? जानें व्रत के पीछे की धार्मिक मान्यता

Sun, 11 Oct 2026 11:52 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा के साथ सात्विक भोजन और फलाहार करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत के दौरान खानपान में संयम रखने से मन की शुद्धता और आध्यात्मिक साधना पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है। जानें नवरात्रि में सात्विक भोजन और फलाहार का धार्मिक महत्व।
विज्ञापन
1 of 8
नवरात्रि में फलाहार क्यों करते हैं - फोटो : amar ujala

नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के साथ खानपान में संयम रखने की भी परंपरा है। इन नौ दिनों में बहुत से लोग सात्विक भोजन करते हैं, जबकि व्रत रखने वाले श्रद्धालु फलाहार या व्रत में खाए जाने वाले विशेष खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं। इस दौरान प्याज, लहसुन, मांसाहार और शराब से परहेज करने की परंपरा भी प्रचलित है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सब्जियों में इस्तेमाल होने वाले प्याज और लहसुन को नवरात्रि के दौरान सात्विक भोजन से अलग क्यों रखा जाता है? इसके पीछे धार्मिक मान्यताओं के साथ आयुर्वेद में बताए गए आहार संबंधी विचार भी जुड़े हैं। नवरात्रि का व्रत केवल भोजन छोड़ने या कुछ चीजें नहीं खाने तक सीमित नहीं माना जाता। यह पूजा-पाठ, आत्मसंयम और अपनी दिनचर्या को अनुशासित रखने का अवसर भी है। आज की जीवनशैली में व्रत रखते समय यह समझना भी जरूरी है कि फलाहार कैसा हो, शरीर को पर्याप्त पोषण कैसे मिले और किन बातों का ध्यान रखा जाए।

Trending Videos
विज्ञापन

2 of 8
नवरात्रि में प्याज और लहसुन क्यों नहीं खाते? - फोटो : freepik.com

नवरात्रि में प्याज और लहसुन क्यों नहीं खाते?
हिंदू धर्म में भोजन को केवल शरीर की जरूरत नहीं, बल्कि मन और व्यवहार से भी जोड़कर देखा जाता है। पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं में नवरात्रि के दौरान सात्विक भोजन करने पर जोर दिया जाता है, ताकि साधक पूजा-पाठ और ध्यान में मन लगा सके। इसी कारण अनेक परिवारों में इन नौ दिनों तक प्याज और लहसुन का इस्तेमाल नहीं किया जाता। पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब भगवान विष्णु मोहिनी रूप में देवताओं को अमृत बांट रहे थे, तब स्वर्भानु नामक असुर देवता का रूप धारण करके देवताओं की पंक्ति में बैठ गया। उसने अमृत पी लिया, लेकिन सूर्य और चंद्रमा ने उसकी पहचान उजागर कर दी। इसके बाद भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया। मान्यता है कि अमृत की कुछ बूंदें धरती पर गिरने से प्याज और लहसुन उत्पन्न हुए। इस कथा की अलग-अलग धार्मिक व्याख्याएं मिलती हैं। कुछ परंपराओं में प्याज और लहसुन को इसी कारण पूजा और सात्विक आहार से दूर रखा जाता है। हालांकि, यह एक पौराणिक मान्यता है, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उत्पत्ति की कहानी नहीं।

विज्ञापन

3 of 8
आयुर्वेद में प्याज और लहसुन को लेकर क्या विचार हैं? - फोटो : अमर उजाला

आयुर्वेद में प्याज और लहसुन को लेकर क्या विचार हैं?
आयुर्वेद और पारंपरिक भारतीय आहार संबंधी विचारों में भोजन को सात्विक, राजसिक और तामसिक श्रेणियों में बांटने की अवधारणा मिलती है। सात्विक भोजन को सादगी, संतुलन और मानसिक शांति से जोड़ा जाता है। वहीं, कुछ पारंपरिक व्याख्याओं में प्याज और लहसुन को राजसिक या तामसिक आहार की श्रेणी में रखा जाता है। इसी विचार के आधार पर नवरात्रि के दौरान इनसे परहेज करने की परंपरा है। हालांकि, अलग-अलग धार्मिक समुदायों और परिवारों में खानपान के नियम अलग हो सकते हैं। प्याज और लहसुन सामान्य आहार में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थ हैं और इनमें उपयोगी पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। इन्हें सभी परिस्थितियों में नुकसानदेह मानना सही नहीं होगा।

4 of 8
नवरात्रि में सात्विक भोजन करने का क्या महत्व है? - फोटो : AI

नवरात्रि में सात्विक भोजन करने का क्या महत्व है?
नवरात्रि के दौरान सात्विक भोजन का उद्देश्य पूजा-पाठ के साथ-साथ संयम और अनुशासन बनाए रखना माना जाता है। आमतौर पर इस दौरान हल्का, ताजा और कम मसाले वाला भोजन पसंद किया जाता है। फल, दूध, दही, मेवे और कुछ विशेष अनाज या कंद का सेवन व्रत के नियमों के अनुसार किया जाता है। संतुलित और आसानी से पचने वाला भोजन रोजमर्रा की दिनचर्या में भी उपयोगी हो सकता है। हालांकि, सात्विक भोजन का मतलब केवल सादा खाना नहीं है, बल्कि भोजन की गुणवत्ता, मात्रा, ताजगी और शरीर की जरूरतों का ध्यान रखना भी जरूरी है। नवरात्रि में कुछ लोग नौ दिन तक व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग पहले और अंतिम दिन या केवल अष्टमी-नवमी पर उपवास करते हैं। ऐसे में हर व्यक्ति के लिए एक जैसा खानपान जरूरी नहीं है। व्रत की अवधि और भोजन का चुनाव अपनी दिनचर्या, स्वास्थ्य और पारिवारिक परंपराओं को ध्यान में रखकर करना चाहिए।

विज्ञापन

5 of 8
नवरात्रि में फलाहार क्यों करते हैं? - फोटो : instagram

नवरात्रि में फलाहार क्यों करते हैं?
फलाहार नवरात्रि के व्रत का एक प्रमुख हिस्सा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, उपवास के दौरान फल और व्रत में स्वीकार्य खाद्य पदार्थों का सेवन करने से साधक अपने धार्मिक नियमों का पालन कर सकता है। फलाहार का अर्थ केवल फल खाना नहीं है। अलग-अलग परंपराओं में इसमें दूध, दही, मेवे, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़े का आटा और अन्य व्रत-अनुकूल खाद्य पदार्थ भी शामिल किए जाते हैं। फल और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों से शरीर को ऊर्जा, विटामिन, खनिज और दूसरे जरूरी पोषक तत्व मिल सकते हैं। लेकिन केवल चाय, आलू या तली हुई चीजों पर निर्भर रहने से भोजन संतुलित नहीं रह जाता। इसलिए व्रत में भी भोजन की विविधता और पर्याप्त मात्रा का ध्यान रखना चाहिए।

विज्ञापन

6 of 8
नवरात्रि में फलाहार के लिए क्या खा सकते हैं? - फोटो : संवाद

नवरात्रि में फलाहार के लिए क्या खा सकते हैं?

  • फल: सेब, केला, पपीता, अनार, संतरा और मौसमी फल।
  • दूध और दही: दूध, दही और बिना अधिक चीनी वाली लस्सी।
  • मेवे और बीज: बादाम, अखरोट, मूंगफली और व्रत में स्वीकार्य बीज।
  • व्रत वाले खाद्य पदार्थ: साबूदाना, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा और राजगीरा, यदि आपकी परंपरा में स्वीकार्य हों।
  • कंद और सब्जियां: आलू, शकरकंद और अन्य व्रत-अनुकूल सब्जियां।
  • पेय पदार्थ: पर्याप्त पानी, नारियल पानी और बिना अधिक चीनी वाले पेय।
विज्ञापन

7 of 8
क्या नवरात्रि में प्याज-लहसुन छोड़ने का कोई वैज्ञानिक कारण भी है? - फोटो : AI
क्या नवरात्रि में प्याज-लहसुन छोड़ने का कोई वैज्ञानिक कारण भी है?
नवरात्रि के दौरान प्याज और लहसुन न खाने की परंपरा को अक्सर मौसम में बदलाव और पाचन से जोड़कर समझाया जाता है। चैत्र नवरात्रि आमतौर पर वसंत से गर्मी की ओर बढ़ते मौसम में आती है, जबकि शारदीय नवरात्रि वर्षा ऋतु के बाद शरद ऋतु के समय पड़ती है। इन अवधियों में तापमान और दिनचर्या में बदलाव हो सकता है। ऐसे समय पर्याप्त पानी पीना, स्वच्छ भोजन करना और अपनी भूख व जरूरत के अनुसार संतुलित आहार लेना उपयोगी है। अधिक तला हुआ, बहुत मसालेदार या भारी भोजन कुछ लोगों को अपच और पेट में असहजता दे सकता है। हल्का और संतुलित भोजन ऐसे लोगों के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है। हालांकि, वैज्ञानिक प्रमाण यह नहीं बताते कि नवरात्रि के दौरान प्याज और लहसुन खाना अपने आप में नुकसानदेह है या इनसे परहेज करना सभी के लिए जरूरी है। इन खाद्य पदार्थों का सेवन करना या न करना मुख्य रूप से धार्मिक परंपरा, व्यक्तिगत पसंद और शरीर की सहनशीलता पर निर्भर करता है।
विज्ञापन

8 of 8
व्रत रखते समय इन बातों का रखें ध्यान - फोटो : AI

व्रत रखते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • नवरात्रि में श्रद्धा के साथ अपनी सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है।
  • व्रत के दौरान लंबे समय तक भूखे रहने या पर्याप्त भोजन और पानी न लेने से कुछ लोगों को कमजोरी, सिरदर्द या चक्कर आने जैसी परेशानी हो सकती है।
  • इसलिए दिनभर पर्याप्त पानी पिएं और फलाहार में फल, दूध-दही, मेवे तथा अन्य स्वीकार्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करें।
  • केवल तली हुई व्रत की चीजों पर निर्भर न रहें।
  • यदि आप नियमित दवाएं लेते हैं, मधुमेह जैसी कोई स्वास्थ्य समस्या है या पहले से किसी बीमारी का इलाज चल रहा है, तो उपवास रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
  • नवरात्रि का मूल भाव मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा, आत्मसंयम और सकारात्मकता से जुड़ा है।
  • भोजन को लेकर कठोरता बरतने के बजाय अपनी धार्मिक परंपरा का पालन करते हुए शरीर की जरूरतों का सम्मान करना भी महत्वपूर्ण है।
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें