फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शरद पूर्णिमा कब है? जानें की सही तारीख, पूजा का शुभ समय और खीर की मान्यता

Fri, 02 Oct 2026 01:18 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाली पूर्णिमा तिथियों में से एक है। इस दिन चंद्रमा की पूजा और मां लक्ष्मी की आराधना करने की परंपरा है।
विज्ञापन
1 of 7
शरद पूर्णिमा - फोटो : amar ujala

शरद पूर्णिमा हिंदू पंचांग की महत्वपूर्ण पूर्णिमा तिथियों में शामिल है। इस दिन भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जागकर उनकी आराधना करने वाले भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। इसी वजह से इसे कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। मिथिलांचल में इस पर्व को चुमाओन भी कहा जाता है। हर साल यह पर्व आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन चंद्रमा की पूजा के साथ रात में खीर बनाकर चांदनी में रखने की भी परंपरा है। आइए जानते हैं वर्ष 2026 में शरद पूर्णिमा कब मनाई जाएगी, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा और खीर से जुड़ी धार्मिक मान्यता क्या है।

विज्ञापन

2 of 7
आश्विन शुक्ल पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 25 अक्तूबर 2026 को सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर होगी। - फोटो : adobe stock

शरद पूर्णिमा कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन शुक्ल पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 25 अक्तूबर 2026 को सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर होगी। पूर्णिमा तिथि का समापन 26 अक्तूबर को सुबह 9 बजकर 11 मिनट पर होगा। उदया तिथि और पर्व की परंपरा के अनुसार इस वर्ष शरद पूर्णिमा 25 अक्तूबर, रविवार को मनाई जाएगी।

विज्ञापन

3 of 7
शरद पूर्णिमा पूजा का शुभ मुहूर्त - फोटो : adobe stock

शरद पूर्णिमा पूजा का शुभ मुहूर्त
शरद पूर्णिमा पर रात में पूजा और मां लक्ष्मी की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है।
निशिता काल: रात 11:39 बजे से 12:31 बजे तक
इस दौरान श्रद्धालु मां लक्ष्मी, भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा कर सकते हैं।

4 of 7
शरद पूर्णिमा की सबसे प्रसिद्ध परंपराओं में से एक रात में खीर को चांदनी में रखना है। - फोटो : instagram

शरद पूर्णिमा की रात खीर क्यों रखी जाती है?
शरद पूर्णिमा की सबसे प्रसिद्ध परंपराओं में से एक रात में खीर को चांदनी में रखना है। इस दिन दूध और चावल से खीर तैयार की जाती है और रात में इसे खुले आसमान के नीचे रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणों में विशेष औषधीय और अमृतमय प्रभाव होता है। मान्यता के अनुसार, चांदनी में रखी गई खीर अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण की जाती है। दूध और चावल से बनी खीर को शुद्धता, पोषण और समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है। इसी कारण शरद पूर्णिमा की पूजा में इसका विशेष स्थान है।

विज्ञापन

5 of 7
धार्मिक मान्यताओं में शरद पूर्णिमा को मां लक्ष्मी की आराधना के लिए विशेष माना गया है। - फोटो : Freepik

शरद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं में शरद पूर्णिमा को मां लक्ष्मी की आराधना के लिए विशेष माना गया है। कहा जाता है कि इस रात देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और यह देखती हैं कि कौन जागकर उनकी पूजा कर रहा है। इसी मान्यता के कारण कई स्थानों पर रात में जागरण और लक्ष्मी पूजन किया जाता है। शरद पूर्णिमा के साथ चातुर्मास की अवधि के समापन की मान्यता भी जुड़ी है। इसके बाद मांगलिक और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल समय शुरू होने की बात धार्मिक परंपराओं में कही गई है। भक्त इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

विज्ञापन

6 of 7
शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। - फोटो : freepik

शरद पूर्णिमा पूजा विधि

  • शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
  • पूजा से पहले मां लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर को गंगाजल से शुद्ध करें। इसके बाद उन्हें लाल वस्त्र पर विधिपूर्वक स्थापित करें। पूजा स्थल पर धूप और दीप जलाएं और मां लक्ष्मी को फूल अर्पित करें।
  • शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। पूजा के बाद भगवान को भोग लगाएं और आरती करें।
  • अगर आपने शरद पूर्णिमा का व्रत रखा है, तो रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण करें। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करना भी शुभ माना जाता है।
  • शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने की भी परंपरा है। मान्यता है कि रात में चंद्रमा की किरणों के नीचे रखी खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
शरद पूर्णिमा के दिन पूजा के लिए सफेद या पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। - फोटो : Freepik

चांद को अर्घ्य देते समय इस मंत्र का करें जाप
शरद पूर्णिमा के दिन पूजा के लिए सफेद या पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में सफेद कपड़ा बिछाकर उस पर चंद्र देव और मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद तांबे या चांदी के कलश में जल भरें और उसमें आम के पत्ते लगाकर ऊपर नारियल रखें। कलश पर कुमकुम, अक्षत और फूल अर्पित करें। मां लक्ष्मी की पूजा में रोली, चावल, पुष्प, दीप और भोग चढ़ाएं। इसके साथ लक्ष्मी चालीसा या लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं। रात में चंद्रमा के दर्शन करने के बाद जल में थोड़ा दूध मिलाकर चंद्र देव को अर्घ्य दें। इस दौरान 'ॐ चंद्राय नमः' या 'ॐ सोमाय नमः' मंत्र का 11 या 108 बार जाप करें। इसके बाद खीर का भोग लगाएं और उसे कुछ समय के लिए खुले आकाश के नीचे चांदनी में रखें। अंत में चंद्र देव की आरती करें और प्रसाद ग्रहण करें।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें