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Shaniwar Ke Upay: शनिवार को इस चालीसा के पाठ से दूर होते हैं सभी दुख-दर्द, व्यक्ति को मिलते हैं ये 5 बड़े लाभ

Sat, 17 Jan 2026 12:09 AM IST
मेघा कुमारी ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Shaniwar Ke Upay: शनिवार को शनिदेव की पूजा और उनकी चालीसा का पाठ करना शुभ होता है। इसके प्रभाव से जीवन में कई बदलाव आते हैं और साधक नकारात्मकता से मुक्ति पाता है।
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शनिवार के उपाय - फोटो : अमर उजाला
Shaniwar Ke Upay: हिंदू धर्म में शनिवार विशेष महत्व रखता है। यह कर्मफलदाता शनिदेव को समर्पित दिन है। मान्यता है कि, शनिवार को काली चीजों का दान और शनि महाराज की पूजा करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं। साथ ही साधक पर अपनी विशेष कृपा बरसाते हैं। हालांकि, शनिवार को शनि चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना गया है। ऐसा करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव में कमी आती हैं। साथ ही जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं, मानसिक तनाव कम होता है और कार्यों में स्थिरता व सफलता प्राप्त होती हैं। इस दौरान साधक को बेहतर स्वास्थ्य का भी आशीर्वाद मिलता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनिवार को शनि चालीसा का पाठ करने से शनिदेव का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही नकारात्मकता का प्रभाव भी कम होने लगता है। आइए इस शक्तिशाली चालीसा को जानते हैं।
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Shaniwar Ke Upay - फोटो : freepik
शनि चालीसा के लाभ
शनि चालीसा के पाठ से व्यक्ति को शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त होती हैं। साथ ही प्रभु के आशीर्वाद से सभी कष्टों का निवारण होता है। इस चालीसा का पाठ शाम को करना चाहिए। इससे शनि दोष और साढ़े साती का प्रभाव कम होता है।
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Shaniwar Ke Upay - फोटो : adobe
  • यह पाठ जीवन में कई बदलाव लेकर आता है और साधक को कारोबार में लाभ, करियर में दिशा और उसकी सभी मनोकामना पूरी होती हैं। मानसिक शांति और सकारात्मकता भी जीवन में बढ़ती हैं।
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Shaniwar Ke Upay - फोटो : अमर उजाला

श्री शनि चालीसा  

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।
दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥

जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥

जयति जयति शनिदेव दयाला।
करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥

चारि भुजा, तनु श्याम विराजै।
माथे रतन मुकुट छबि छाजै॥

परम विशाल मनोहर भाला।
टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥

कुण्डल श्रवण चमाचम चमके।
हिय माल मुक्तन मणि दमके॥

कर में गदा त्रिशूल कुठारा।
पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥

पिंगल, कृष्णो, छाया नन्दन।
यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन॥

सौरी, मन्द, शनी, दश नामा।
भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥

जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं।
रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं॥

पर्वतहू तृण होई निहारत।
तृणहू को पर्वत करि डारत॥

राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो।
कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो॥

बनहूँ में मृग कपट दिखाई।
मातु जानकी गई चुराई॥

लखनहिं शक्ति विकल करिडारा।
मचिगा दल में हाहाकारा॥

रावण की गति-मति बौराई।
रामचंद्र सों बैर बढ़ाई॥

दियो कीट करि कंचन लंका।
बजि बजरंग बीर की डंका॥

नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा।
चित्र मयूर निगलि गै हारा॥

हार नौलखा लाग्यो चोरी।
हाथ पैर डरवायो तोरी॥

भारी दशा निकृष्ट दिखायो।
तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो॥

विनय राग दीपक महं कीन्हयों।
तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों॥

हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी।
आपहुं भरे डोम घर पानी॥

तैसे नल पर दशा सिरानी।
भूंजी-मीन कूद गई पानी॥

श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई।
पारवती को सती कराई॥

तनिक विलोकत ही करि रीसा।
नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा॥

पांडव पर भै दशा तुम्हारी।
बची द्रौपदी होति उघारी॥

कौरव के भी गति मति मारयो।
युद्ध महाभारत करि डारयो॥

रवि कहं मुख महं धरि तत्काला।
लेकर कूदि परयो पाताला॥

शेष देव-लखि विनती लाई।
रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥

वाहन प्रभु के सात सुजाना।
जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥

जंबुक सिंह आदि नख धारी।
सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं।
हय ते सुख सम्पति उपजावैं॥

गर्दभ हानि करै बहु काजा।
सिंह सिद्धकर राज समाजा॥

जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै।
मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥

जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी।
चोरी आदि होय डर भारी॥

तैसहि चारि चरण यह नामा।
स्वर्ण लौह चांदी अरु तामा॥

लौह चरण पर जब प्रभु आवैं।
धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं॥

समता ताम्र रजत शुभकारी।
स्वर्ण सर्व सर्व सुख मंगल भारी॥

जो यह शनि चरित्र नित गावै।
कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥

अद्भुत नाथ दिखावैं लीला।
करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥

जो पंडित सुयोग्य बुलवाई।
विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥

पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत।
दीप दान दै बहु सुख पावत॥

कहत राम सुन्दर प्रभु दासा।
शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥


दोहा

पाठ शनिश्चर देव को, की हों 'भक्त' तैयार।
करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार॥
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): 
ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 

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