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Shani jayanti 2021: कैसे बने शनि देव कर्मफल दाता, जानिए इसी तरह उनसे जुड़ी खास बातें

Sat, 05 Jun 2021 05:00 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

  • इस बार 10 जून 2021 दिन गुरूवार को शनि जयंती मनाई जाएगी।
  • जानिए शनिदेव कैसे बने कर्मफलदाता और दंडाधिकारी
  • शनिदेव की पूजा हमेशा सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद की जाती है।
  • शिव भक्तों और हनुमान भक्तों पर शनिदवे अपनी अशुभ दृष्टि नहीं डालते हैं। 
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शनिदेव जयंती 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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विस्तार
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धार्मिक मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को शनि देव का जन्म हुआ था इसलिए प्रत्येक वर्ष इस दिन को शनि जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस बार शनि जयंती 10 जून 2021 दिन गुरुवार को मनाई जाएगी। शनि को देव और ग्रह दोनों का दर्जा दिया गया है। इनके विषय में मान्यता है कि ये पल भर में रंक को राजा और राजा को भी रंक बना सकते हैं। ज्योतिष में शनि को क्रूर ग्रह माना जाता है। ज्यादातर लोग शनि का नाम सुनकर ही घबरा जातें हैं क्योंकि इनको लेकर कई तरह की भ्रांतियां हैं। इन्हें मारक, अशुभ और दुख कारक माना जाता है किंतु ये मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। ये बुरे कर्म करने वालों के लिए दंड नायक हैं तो अच्छे कर्म करने वालों को शनिदेव अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं, इसलिए इन्हें न्यायधीश और कर्मफलदाता कहा जाता है। शनि जयंती के पावन अवसर पर जानिए शनिदेव से जुड़ी खास बातें और जानिए कि शनिदेव कैसे बने कर्मफलदाता।

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शनिदेव जयंती 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
शनिदेव से जुड़ी खास बातें 
  • शनिदेव सूर्य पुत्र हैं परंतु फिर भी इनकी पूजा सदैव सूर्योदय से पहले या फिर सूर्यास्त के बाद ही की जाती है। धार्मिक कथाओं के अनुसार शनिदेव की अपने पिता से वैरभाव रखते हैं।
  • शनिदेव के कई मंदिर पूरे भारतवर्ष में बने हुए हैं लेकिन महराष्ट्र के शिंगणापुर में बना शनि मंदिर खास महत्व रखता है माना जाता है यह शनिदेव का जन्मस्थान है। यहां पर  गर्मी, सर्दी और बरसात के मौसम में शनिदेव सदैव बिना छत्र के रहते हैं। उनकी प्रतीकात्मक शिला एक खुले स्थान पर स्थापित है।
  • शिव जी शनिदेव के गुरु हैं इसलिए शिव जी की पूजा आराधना करने वाले पर शनिदेव अपनी कुदृष्टि नहीं करते हैं।

शनिदेव जयंती 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
  • इसके अलावा हनुमान भक्तों पर भी शनिदेव अपनी अशुभ दृष्टि नहीं डालते हैं। इस विषय में पौराणिक कथा मिलती है कि हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था। 
  • शनि देव सूर्य के पत्नी छाया के पुत्र हैं, इनके भाई यम और मनु हैं और इनकी बहन यमुनाजी हैं। शनिदेव अपनी बहन यमुना से विशेष प्रेमभाव रखते हैं।
  • शनिदेव सभी ग्रहों में सबसे धीमी गति से भ्रमण करने वाले ग्रह हैं। शनै-शनै चलने के कारण इन्हें शनैश्चर भी कहा जाता है। 
  • ज्योतिष के अनुसार शनि तुला राशि में उच्च और मेष राशि में नीच रहते हैं। मकर और कुंभ राशि के ये स्वामी हैं। 
  • इनका वर्ण काला है और ये नीले वस्त्र धारण करते हैं। ये गिद्ध पर सवारी करते हैं। इनके एक हाथ में धनुष तो दूसरा हाथ वरमुद्रा में रहता है। इनका अस्त्र लोहे का इसलिए लोहा इनकी धातु मानी गई है।
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शनिदेव जयंती 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
ऐसे बने शनिदेव कर्मफलदाता
धार्मिक कथा के अनुसार भगवान सूर्य अपनी पत्नी छाया के पास पहुंचे तो सूर्य के प्रकाश और तेज से उनकी पत्नी छाया ने अपनी आंखें बंद कर ली। उनके इसी व्यवहार के कारण उन्हें श्यामवर्ण पुत्र शनिदेव की प्राप्ति हुई। जब सूर्यदेव में शनिदेव का श्यामवर्ण को देखा तो उन्होंने कर छाया पर आरोप लगाया कि ये मेरा पुत्र नहीं है, इसलिए शनिदेव अपने पिता पर क्रुद्ध हो गए। 

जिसके बाद शनिदेव ने भगवान शिव की घोर तपस्या की और शरीर अपने शरीर को जला लिया। भगवान शिव शनिदेव की भक्ति से अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्हें वर मांगने कहा इस पर शनि ने शिव जी से वरदान मांगा कि युगों-युगों से मेरा माता छाया की पराजय होती रही है और मेरी माता को सदैव मेरे पिता सूर्य से अपमान झेलना पड़ा है, इसलिए मैं चाहता हूं कि मैं अपने पिता से ज्यादा पूज्य बनूं और उनका अहंकार टूट जाए। भगवान शिव ने शनिदेव को वरदान दिया कि तुम नवग्रहों में सर्वश्रेष्ठ होगे और  न्यायाधीश एवं दंडाधिकारी रहोगे। तुम ही लोगों को उनके कर्मों के अनुसार न्याय और दण्ड दोगे। 
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