पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन धरती पर दिव्य ऊर्जा सक्रिय होती है
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भाद्रपद में कुशोत्पाटिनी अमावस्या का महत्व
भाद्रपद माह की अमावस्या को धर्मशास्त्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है। यह तिथि श्राद्ध पक्ष की शुरुआत मानी जाती है, जब पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, दान और मंत्रजप जैसे धार्मिक कार्य आरंभ होते हैं। इस दिन से विशेष रूप से कुशा नामक पवित्र घास को धार्मिक कार्यों के लिए भूमि से एकत्र किया जाता है, इसीलिए इसे कुश पितृणी अमावस्या भी कहा जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन धरती पर दिव्य ऊर्जा सक्रिय होती है और भगवान विष्णु ने इसी दिन कुशा को धार्मिक कर्मों के योग्य पवित्र किया था। यही कारण है कि श्राद्ध, यज्ञ और तप के कार्यों में इसी दिन तोड़ी गई कुशा का उपयोग विशेष फल देने वाला माना जाता है।