Sawan Kalashtami 2023: हर महीने में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक कालाष्टमी मनाई जाती है। अधिक मास की कालाष्टमी आज यानी 8 अगस्त को है। यह सावन की दूसरी कालाष्टमी है। वहीं पहली कालाष्टमी तिथि जुलाई में 9 तारीख को थी। मासिक कालाष्टमी बहुत खास मानी जाती है, क्योंकि इस दिन भगवान शिव के पांचवे अवतार बाबा काल भैरव की पूजा की जाती है। ऐसे में सावन माह में इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है। इस दिन व्रत रख कर पूजा करने से शिव जी के साथ बाबा काल भैरव की भी कृपा प्राप्त होती है। कालाष्टमी के दिन शिवालयों और मठों में विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है, जिसमें भगवान शिव के रूप में काल भैरव देव का आह्वान किया जाता है। तो चलिए जानते हैं सावन कालाष्टमी की पूजा विधि और महत्व के बारे...
सावन अधिक मास की कालाष्टमी तिथि की शुरुआत 08 अगस्त दिन मंगलवार को मध्य रात्रि 04 बजकर 14 मिनट से हो रही है। इसका समापन अगले दिन 09 अगस्त को मध्य रात्रि 03 बजकर 52 मिनट पर होगा।
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सावन मासिक कालाष्टमी पूजा विधि
- फोटो : Social Media
सावन कालाष्टमी पूजा विधि
सावन कालाष्टमी व्रत वाले दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। फिर काल भैरव के मंदिर या घर में उनके चित्र को चौकी पर स्थापित करें।
इस दिन भगवान भोलेनाथ के साथ माता पार्वती और गणेश जी की भी पूजा की जाती है।
इसलिए भोलनाथ और माता पार्वती के साथ भगवान गणेश का चित्र भी जरूर स्थापित करें। इसे बाद पूरे विधि-विधान से पूजा करें।
पूजा के दौरान घर के मंदिर में दीपक जलाएं, आरती करें और भगवान को भोग लगाएं।
बाबा काल भैरव का ध्यान करते हुए हाथ में गंगाजल लेकर व्रत का संकल्प लें।
काल भैरव को दूध, दही धूप, दीप, फल, फूल, पंचामृत आदि अर्पित करें।
पूजा में उड़द दाल और सरसों का तेल काल भैरव पर जरूर अर्पित करें।
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सावन मासिक कालाष्टमी पूजा विधि
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कालाष्टमी व्रत का महत्व
मान्यता है कि कालाष्टमी के दिन बाबा काल भैरव की पूजा करने से सभी तरह के भय से मुक्ति मिलती है। साथ ही शत्रुओं से छुटकारा मिल जाता है। इसके अलावा इस दिन व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और शुभ फल की प्राप्ति होती है।