पुराणों में श्रावण मास का अत्यधिक धार्मिक महत्व बताया गया है, क्योंकि यह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और इस दौरान उनकी भक्ति से विशेष फल प्राप्त होते हैं।
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पुराणों में श्रावण मास का अत्यधिक धार्मिक महत्व बताया गया है, क्योंकि यह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और इस दौरान उनकी भक्ति से विशेष फल प्राप्त होते हैं। महादेव मनोकामनाएं पूरी करते हैं, कष्टों से मुक्ति मिलती है। शिव पुराण और स्कंद पुराण में भी इसका उल्लेख है। रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी भी महादेव की भक्ति से जुड़े प्रसंग और महात्यम का वर्णन किए हैं। उन्होंने तो श्रावण मास में पढ़ने वाली चौपाई की रचना भी की है। इसमें 'उमा कहउं मैं अनुभव अपना, सत हरि भजनु जगत सब सपना' या 'वर दायक प्रनतारति भंजन, कृपासिंधु सेवक मन रंजन मन की एकाग्रता के लिए श्रावण मास अत्यंत महत्वपूर्ण मास है। इसमें जैसे मन को साधने से परम तत्व की प्राप्ति संभव है, ठीक वैसे ही जैसे भगवान शंकर ने चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण किया हुआ है।