अमावस्या श्राद्ध का महत्व
इस दिन आप उन सभी पितरों के नाम से भी श्राद्ध कर सकते हैं जिनके श्राद्ध की तिथि आप भूल गए हों या फिर किसी कारण आप उनका श्राद्ध नहीं कर पाएं हैं। इस दिन श्राद्ध करने से पितृगण प्रसन्न होकर अपने परिवार को आशीर्वाद प्रदान करते हैं। मान्यता है कि इस दिन श्राद्ध करने से भोजन पितरों को स्वथा रूप में मिलता है यानि पितरों को अर्पित किया गया भोजन उस रूप में परिवर्तित हो जाता है, जिस रूप में उनका जन्म हुआ होता है। अगर मनुष्य योनि में हो तो अन्न रूप में उन्हें भोजन मिलता है, पशु योनि में घास के रूप में, नाग योनि में वायु रूप में और यक्ष योनि में पान के रूप में भोजन पहुंचाया जाता है। इस दिन ब्राह्राण को भोजन कराने से पहले दक्षिण की ओर मुख करके पंचबलि गाय, कुत्ते, कौए, देवतादि और चींटी के लिए भोजन सामग्री पत्ते पर निकालें।