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Santan Saptami 2025: कब है संतान सप्तमी का व्रत? जानें तिथि, पूजा विधि और महत्व

Sat, 30 Aug 2025 12:06 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Santan Saptami 2025: संतान सप्तमी 2025 में यह तिथि 29 अगस्त की रात 8:25 बजे से शुरू होकर 30 अगस्त की रात 10:46 बजे तक रहेगी। व्रत और पूजा के लिए उदय तिथि को मान्यता दी जाती है, इसलिए मुख्य व्रत 30 अगस्त को रखा जाएगा।
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संतान सप्तमी 2025 - फोटो : अमर उजाला
Santan Saptami Vrat Niyam: हर साल भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को श्रद्धा और आस्था के साथ संतान सप्तमी व्रत रखा जाता है। इस व्रत का विशेष महत्व संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखद भविष्य के लिए माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान सूर्यदेव, भगवान शिव और माता पार्वती की विधिपूर्वक पूजा करने से संतान को सुख-समृद्धि और माता-पिता को मानसिक शांति का आशीर्वाद मिलता है।
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संतान सप्तमी 2025 में यह तिथि 29 अगस्त की रात 8:25 बजे से शुरू होकर 30 अगस्त की रात 10:46 बजे तक रहेगी। व्रत और पूजा के लिए उदय तिथि को मान्यता दी जाती है, इसलिए मुख्य व्रत 30 अगस्त को रखा जाएगा।
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व्रत तिथि और पूजा का समय - फोटो : Adobe stock
व्रत तिथि और पूजा का समय
सप्तमी तिथि शुरू: 29 अगस्त 2025 को रात 8:21 बजे
सप्तमी तिथि समाप्त: 30 अगस्त 2025 को रात 10:46 बजे
मुख्य व्रत तिथि: 30 अगस्त 2025 (उदय तिथि अनुसार)
पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 11:05 बजे से दोपहर 12:47 बजे तक
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संतान सप्तमी व्रत की पूजा विधि - फोटो : Adobe stock
संतान सप्तमी व्रत की पूजा विधि
  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें।
  • शिव जी और माता पार्वती के सामने व्रत का संकल्प लें।
  • एक साफ चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर शिव परिवार की प्रतिमा स्थापित करें।
  • पास में एक कलश रखें, उसमें जल भरें, ऊपर नारियल और आम के पत्ते रखें।
  • देसी घी का दीपक जलाएं और फूल, चावल, पान, सुपारी आदि चढ़ाएं।
  • भगवान शिव और माता पार्वती को वस्त्र अर्पित करें।
  • भोग में पूरी और खीर अर्पित करें।
  • संतान सप्तमी व्रत कथा पढ़ें और फिर आरती करें।
  • पूजा में अगर कोई भूल-चूक हो गई हो तो क्षमा मांगें और बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लें।
  • अगले दिन व्रत का पारण (समापन) प्रसाद ग्रहण करके करें।
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संतान सप्तमी व्रत की पूजा विधि - फोटो : adobe stock
पूजन मंत्र
  • मुख्य मंत्र: ॐ पार्वतीपतये नम:। देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहि मे परमं सुखम्। पुत्र-पौत्रादि समृद्धि देहि में परमेश्वरी।।
  • रुद्र गायत्री मंत्र: ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्।
  • महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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