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Roman God Janus: जानिए कौन है प्राचीन रोम देवता जेनस जिसके नाम पर रखा है जनवरी महीने का नाम

Sat, 01 Jan 2022 05:52 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला
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Roman God Janus - फोटो : istock
Roman God Janus: नववर्ष का आगमन हो चुका है। हिन्दू पंचांग के अनुसार हिन्दी माह अलग होते हैं जैसे पौष, माघ, फाल्गुन श्रावण इत्यादि। लेकिन क्या आप जानते हैं अंग्रेजी माह के जितने भी नाम है वो रोम देवताओं के नाम पर आधारित है। हिन्दू धर्म में जैसे मूर्तिपूजा का वजूद है वैसे ही प्राचीन रोम में मूर्तिपूजा और बहुदेवता वाद की अवधारणा रही है। लेकिन ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार होने के बाद रोम की धार्मिक विरासत इतिहास बन कर रह गई। लेकिन फिर भी रोम के देवता हमारे अंग्रेजी महीनों के नाम से पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं। हम बात करेंगे के रोम के उस देवता की जिसके नाम पर जनवरी माह का नाम पड़ा। हम बात कर रहे हैं आरंभ के देवता कहे जाने वाले जेनस (janus) की। इन्हीं के नाम पर जनवरी माह बना। उस वक्त ‘जेनस’ को ‘इयनियस’ कहा जाता था, क्योंकि प्रचीन लैटिन भाषा में ‘जे’ जैसा कोई चरित्र ही नहीं था. आइए इन्हीं के आधार से जानते हैं रोमन देवता ‘जेनस’ को। 
 
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भूत और भविष्य के देवता - फोटो : istock
भूत और भविष्य के देवता 
प्राचीन रोम की पौराणिक किवदंतियों की मानें तो  जेनस को न केवल आदि का बल्कि, अंत का भी देवता कहता जाता है। कहने का तात्पर्य है कि जेनस भूत और भविष्य पर एक साथ नजर रखने वाले एकलौते देवता हैं। जेनस की जो मूर्ति या तस्वीर देखने को मिलती है उसमें जेनस के 2 चेहरे देखने को मिलते हैं जिसमें से एक भूतकाल का और दूसरा भविष्य का परिचायक है। 
किवदंतियों की मानें तो वह एकमात्र ऐसे रोम के देवता हैं जिन्होंने सृष्टि के आदि और अंत को जाना है। यदि रोंमदेवता के दर्शन को समझने का प्रयास किया जाए तो निष्कर्ष यह निकाल कर आता है कि केवल देवता ही भूतकाल और भविष्य पर नजर रख सकते हैं। मनुष्य को वर्तमान में जीना चाहिए। लेकिन उसके जीवन की योजनाएं भूत कि गलतियों से सीख लेने के बाद और  भविष्य में उसका क्या परिणाम होगा इस आधार पर बननी चाहिए। 
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Roman God Janus - फोटो : istock
क्या कहते हैं इतिहासकार 
रोमन इतिहासकारों का मानना है कि जब सृष्टि की शुरुआत हुई तब केवल जेनस ही थे जिन्हे स्वर्ग के दरवाजों के पीछे रहने का अवसर मिला। उनकी भूमिका धर्म को बनाने, जीवन का निर्माण करने और इसके बाद देवताओं का सृजन करने में रही। इसलिए रोम देवता जेनस को रोमन देवताओं में सर्वोपरि माना कर सबसे पहले पूजा जाता है। 

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Roman God Janus - फोटो : istock
क्या है किवदंतियां 
यूनानी पौराणिक कथाओं के लेखकों ने जेनस के बारे में कई किवदंतियां लिखी हैं।  ऐसा माना जाता है कि जनदेव क्रैन और जेनस का आपस में संबंध है. क्रैन यानि कार्डिया आकर्षण की देवी थी और उसके पास जादुई शक्तियां भी थी। वह लोगों को आकर्षित कर पहाड़ी गुफा में बुलाती और वहां उन्हें कैद कर लिया जाता। रोम देवता जेनस के भूत और भविष्य देख सकते थे आऊस अपनी इस शक्ति के कारण उन्होंने क्रैन यानि कार्डिया का वध कर दिया। 

इसके अलावा एक और किवदंती है जिसमें बताया गया है जेनस ने अपनी बहन कैमिस के साथ लतीम राज्य (जिसके बाद रोम का गठन हुआ) पर शासन किया था।  उस समय जेनस के मंदिरों की भी स्थापना हुई थी।  हालांकि, ये मंदिर सदियों तक बंद रहे, जिसके पीछे रोम निर्माण की घटनाओं में शामिल एक मिथक महत्वपूर्ण कारण माना जाता रहा है। दरअसल एक महिला अपने दो बेटों रोमुलस और रामास के साथ लतीम राज्य में रहती थी। उसके पिता न्यूमिटर युद्ध के देवता के रूप में जाने जाते थे, लेकिन न्यूमिटर के भाई अमूलियस ने उन्हें मारकर अल्बा लोंगर पर राज करना शुरू कर दिया। तभी एक भविष्यवाणी हुई कि रोमुलस और रामास नाम के दो बच्चे अमूलियस के साम्राज्य के पतन का करण बनेंगे।  अत: अमूलियस ने राज्य के सभी नवजात बच्चों को मारना शुरू कर दिया। ऐसे में रोमुलस और रामास की माता ने अपने बच्चों को एक चरवाहे के सुपुर्द कर दिया। उस चरवाहे ने उन्हें इस लायक बनाया कि वे अमूलियस को सत्ता से उखाड़ फेंके। भविष्य में ऐसा ही हुआ। रोमुलस और रामास ने पुराने साम्राज्य को खत्म कर नए रोमास नाम के सम्राज्य की स्थापना की, जो आगे चलकर रोम के नाम से जाना गया। उन्हीं के शासनकाल में एक बार फिर जेनस के मंदिर के दरवाजे खोल दिए गए। कहा जाता है कि इसके बाद जेनस ने हमेशा रोम की रक्षा की।  
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Roman God Janus - फोटो : istock
फादर ऑफ द  ईयर के रूप में जाने जाते हैं जेनस 
जेनस को फादर ऑफ द  ईयर के रूप में संदर्भित किया है। वर्ष की गणना करने के लिए जेनस के मंदिर में 12 वेदियां बनाई गईं।  हर वेदी एक माह को इंगित करती थी।  153 ईसा पूर्व से जनवरी के पहले दिन तक, मुख्य न्यायाधीश ने अपने कार्यालय का काम शुरू किया।  उनका दिन और माह जेनस की प्रार्थना के साथ शुरू होता रहा। किसी भी अच्छे काम की शुरूआत से पहले, जैसे कि जन्म, विवाह आदि के पहले जेनस की पूजा की जाती रही। ऐसा माना जाता था कि रोमन धर्म के अन्य देवताओं तक पहुंचने का मार्ग जेनस की आराधना के साथ ही मिल सकता है।  इस तरह रोमन साम्राज्य में ईसाई धर्म के शामिल होने पर कई अवधारणाओं में परिवर्तन आए, लेकिन केवल जेनस ही थे, जिनका प्रतीक सदियों तक बरकरार रहा। जेनस के दो चेहरे वाले प्रतीक को रोम के दरवाजों,सिक्कों, मुहरों में आज भी संरक्षित करके रखा हुआ है। 
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