एक कथा है कि देवी पार्वती ने भगवान शिव से महिलाओं के लिए मासिक धर्म का नियम बनाने के लिए कहा। इसके बाद से महिलाओं को हर महीने रजोधर्म होने लगा। इसके साथ ही यह नियम बना दिया गया है कि मासिक धर्म के चार दिनों में महिलाएं धार्मिक कार्यों को करने की अधिकारी नहीं होगी।
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पुराणों के अनुसार उन चार दिनों के लिए महिलाओं को करना चाहिए यह व्रत, मिलता है बड़ा लाभ
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रजोधर्म
मनुस्मृति और भविष्य पुराण में इन दिनों स्त्रियों को अपने पति से भी दूर रहने के लिए कहा गया है। इस बारे में पुराण में एक कथा का भी उल्लेख किया गया है जिसमें बताया गया है कि इन दिनों स्त्रियों का भोजन बनाना, पति के साथ रहना और धार्मिक कार्यों को करने का क्या परिणाम होता है।
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पुराणों के अनुसार उन चार दिनों के लिए महिलाओं को करना चाहिए यह व्रत, मिलता है बड़ा लाभ
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ध्यान
विदर्भ देश में उत्तंक नाम के एक साधु पुरूष रहते थे। इनकी एक पुत्र और एक पुत्री दो संतान थी। विवाह की उम्र होने पर साधु ने पुत्री का विवाह एक सुयोग्य वर के साथ कर दिया। लेकिन इनके पति की मृत्यु कुछ ही दिनों के बाद हो गई। अपनी कन्या को लेकर साधु परिवार सहित गंगा तट पर चले आए। यहीं कुटिया बनकर इन्होंने अपना जीवन बिताना शुरू किया।
पुराणों के अनुसार उन चार दिनों के लिए महिलाओं को करना चाहिए यह व्रत, मिलता है बड़ा लाभ
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Ganga
- फोटो : bbc
एक दिन की बात है साधु की कन्या सो रही थी। कन्या की मां ने देखा कि उसकी पुत्री का शरीर कीड़ों से भर गया। वह अपने पति के पास गई और बोली देखिए हमारी पुत्री का शरीर कीड़ों से भर गया है। आखिर कौन सा पाप किया है इसने जिससे अल्पायु में विधवा हो गई और फिर शरीर में कीड़े पड़ गए।
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ध्यान
साधु ने ध्यान लगाकर देखा तो पाया कि उनकी कन्या पूर्व जन्म में भी साधु की पुत्री थी। उसने रजस्वला होते भी भोजन के बर्तन छू दिए थे जिससे साधु का धर्म नष्ट हुआ और यह अल्पायु में विधवा हुई। इस जन्म में इसने पाप मुक्ति के लिए ऋषि पंचमी का व्रत नहीं किया। इसलिए इसके शरीर में कीड़े पड़े हैं। उत्तंक ने कहा कि अगर हमारी पुत्री अब भी ऋषि पंचमी का व्रत करें तो इसके दुख दूर हो जाएंगे और अगले जन्म में अटल सौभाग्य प्राप्त करेगी।
पुराणों के अनुसार उन चार दिनों के लिए महिलाओं को करना चाहिए यह व्रत, मिलता है बड़ा लाभ
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शिव पार्वती
पिता की आज्ञा से साधु की पुत्री ने विधिपूर्वक ऋषि पंचमी का व्रत एवं पूजन किया। व्रत के प्रभाव से वह अगले जन्म में अटल सौभाग्य एवं अक्षय सुखों को प्राप्त करने में सफल हुई। इस वर्ष ऋषि पंचमी 6 सितंबर को है, पुराणों के अनुसार इस व्रत से पूर्वजन्म के पाप नष्ट होते हैं और अगले जन्म में अटल सौभाग्य की प्राप्ति होती है।