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Ganesh Ji Ke Achuk Upay: इन सरल उपायों से दूर होती हैं सभी परेशानियां, काम में मिलती है सफलता

Sun, 10 May 2026 02:50 PM IST
Megha Kumari ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Ganesh Ji Ke Achuk Upay: माना जाता है कि, गणेश जी की पूजा और उन्हें कुछ चीजों का भोग लगाने से कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होने लगती हैं। साथ ही सफलता के मार्ग खुलते हैं।
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Ganesh Ji Ke Achuk Upay - फोटो : अमर उजाला
Ganesh Ji Ke Achuk Upay: हिंदू धर्म में गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है, जो प्रथम पूज्य देवता भी माने जाते हैं। मान्यता है कि, उनकी पूजा करने से जीवन की बाधाएं, परेशानियां और सभी तरह की नकारात्मकता दूर होती हैं। साथ ही भगवान गणेश की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि आती हैं और कार्यों में सफलता प्राप्त होती हैं। यही कारण है कि, किसी भी नए काम से पहले गणेश पूजन का विधान है, जो बेहद खास और महत्वपूर्ण होता है। यदि सच्चे भाव से प्रभु को कुछ खास चीजें अर्पित की जाएं, तो सफलता के रास्ते खुलते हैं। साथ ही रुके हुए कार्य भी बनने लगते हैं। ऐसे में आइए इन सरल उपायों को जानते हैं।
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Ganesh Ji Ke Achuk Upay - फोटो : freepik
मोदक का भोग लगाएं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश को मोदक अत्यंत प्रिय माना जाता है। खासकर बुधवार के दिन उन्हें मोदक का भोग लगाने से वह शीघ्र प्रसन्न होते हैं। इससे करियर, शिक्षा और व्यापार में सफलता प्राप्त होती हैं।
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Ganesh Ji Ke Achuk Upay - फोटो : freepik
दूर्वा घास 
माना जाता है कि, गणेश जी को दूर्वा घास यानी दूब चढ़ाना चाहिए। यह बहुत शुभ माना गया है। कहते हैं कि, पूजा के दौरान श्रद्धा से दूर्वा अर्पित कर अपनी मनोकामना कहने से कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होने लगती हैं। 

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Ganesh Ji Ke Achuk Upay - फोटो : freepik
लाल सिंदूर चढ़ाएं
शास्त्रों के अनुसार, लाल सिंदूर भगवान गणेश को चढ़ाने से शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। इससे घर में सुख-समृद्धि आती है और व्यक्ति के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

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Ganesh Ji Ke Achuk Upay - फोटो : freepik
मंत्रों का जाप करें
यदि किसी भी कार्य को पूरा करने में बार-बार समस्याएं आ रही हैं, तो गणेश जी के मंत्रों का जाप करना बेहद लाभकारी माना जाता है। इसके प्रभाव से  व्यक्ति को कार्यों में सफलता मिलने लगती है।

1. वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥

2. गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:।
नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक :।।
धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:।
गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम।।

3.ॐ ग्लौम गौरी पुत्र,वक्रतुंड,गणपति गुरु गणेश
ग्लौम गणपति,ऋदि्ध पति। मेरे दूर करो क्लेश।।



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Ganesh Ji Ke Achuk Upay - फोटो : freepik
गणेश चालीसा का पाठ करें
गणेश चालीसा पढ़ने से भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि इससे आर्थिक परेशानियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं।

श्री गणेश चालीसा
दोहा
जय गणपति सदगुणसदन, कविवर बदन कृपाल।
विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥

चौपाई
जय जय जय गणपति गणराजू। मंगल भरण करण शुभ काजू॥
जय गजबदन सदन सुखदाता। विश्व विनायक बुद्घि विधाता॥
वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन। तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥
राजत मणि मुक्तन उर माला। स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥

पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं। मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥
सुन्दर पीताम्बर तन साजित। चरण पादुका मुनि मन राजित॥
धनि शिवसुवन षडानन भ्राता। गौरी ललन विश्व-विख्याता॥
ऋद्घि-सिद्घि तव चंवर सुधारे। मूषक वाहन सोहत द्घारे॥

कहौ जन्म शुभ-कथा तुम्हारी। अति शुचि पावन मंगलकारी॥
एक समय गिरिराज कुमारी। पुत्र हेतु तप कीन्हो भारी॥
भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा। तब पहुंच्यो तुम धरि द्घिज रुपा॥
अतिथि जानि कै गौरि सुखारी। बहुविधि सेवा करी तुम्हारी॥

अति प्रसन्न है तुम वर दीन्हा। मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥
मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला। बिना गर्भ धारण, यहि काला॥
गणनायक, गुण ज्ञान निधाना। पूजित प्रथम, रुप भगवाना॥
अस कहि अन्तर्धान रुप है। पलना पर बालक स्वरुप है॥

बनि शिशु, रुदन जबहिं तुम ठाना। लखि मुख सुख नहिं गौरि समाना॥
सकल मगन, सुखमंगल गावहिं। नभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं॥
शम्भु, उमा, बहु दान लुटावहिं। सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं॥
लखि अति आनन्द मंगल साजा। देखन भी आये शनि राजा॥

निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं। बालक, देखन चाहत नाहीं॥
गिरिजा कछु मन भेद बढ़ायो। उत्सव मोर, न शनि तुहि भायो॥
कहन लगे शनि, मन सकुचाई। का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई॥
नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ। शनि सों बालक देखन कहाऊ॥

पडतहिं, शनि दृग कोण प्रकाशा। बालक सिर उड़ि गयो अकाशा॥
गिरिजा गिरीं विकल हुए धरणी। सो दुख दशा गयो नहीं वरणी॥
हाहाकार मच्यो कैलाशा। शनि कीन्हो लखि सुत को नाशा॥
तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो। काटि चक्र सो गज शिर लाये॥

बालक के धड़ ऊपर धारयो। प्राण, मंत्र पढ़ि शंकर डारयो॥
नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे। प्रथम पूज्य बुद्घि निधि, वन दीन्हे॥
बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा। पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा॥
चले षडानन, भरमि भुलाई। रचे बैठ तुम बुद्घि उपाई॥

धनि गणेश कहि शिव हिय हरषे। नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥
चरण मातु-पितु के धर लीन्हें। तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥
तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई। शेष सहसमुख सके न गाई॥
मैं मतिहीन मलीन दुखारी। करहुं कौन विधि विनय तुम्हारी॥

भजत रामसुन्दर प्रभुदासा। जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा॥
अब प्रभु दया दीन पर कीजै। अपनी भक्ति शक्ति कछु दीजै॥
श्री गणेश यह चालीसा। पाठ करै कर ध्यान॥
नित नव मंगल गृह बसै। लहे जगत सन्मान॥

दोहा
सम्वत अपन सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश।
पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ति गणेश॥

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण):
 यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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