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Shri Radha Kripa Kataksh Stotra: मनोकामना पूर्ति के लिए होली पर करें इस स्तोत्र का पाठ, महादेव ने स्वयं की थी इसकी रचना

Mon, 07 Mar 2022 12:29 PM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजला, नई दिल्ली
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राधा रानी को प्रसन्न करने के लिए करें श्रीराधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र का पाठ - फोटो : iStock
Shri Radha Kripa Kataksh Stotra: संसार में जब भी प्रेम की मिसाल दी जाती है तो कृष्ण-राधा के प्रेम का नाम सबसे पहले लिया जाता है। राधा-कृष्ण का प्रेम ऐसा था जिसकी आज भी मिसाल दी जाती है। यही वजह है कि भगवान श्री कृष्ण के भक्तों से हमेशा कहा जाता है कि अगर कन्हा को प्रसन्न करना है, तो राधारानी का नाम जरूर लीजिए। राधा रानी श्रीकृष्ण की प्रेमिका ही नहीं, बल्कि उनकी आत्मा हैं और शक्ति स्वरूपा प्रेम की देवी भी हैं। राधा-कृष्ण के प्रेम को जीवात्मा और परमात्मा का मिलन कहा जाता है। राधा का नाम हमेशा कृष्ण से पहले लिया जाता है, क्योंकि कहा जाता है कि राधा के नाम मात्र से श्रीकृष्ण का रोम रोम प्रफुल्लित हो जाता है। ऐसे में अगर आप भी राधा-कृष्ण की कृपा पाना चाहते हैं, तो नियमित रूप से ‘श्रीराधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र’ का पाठ करें। इससे दोनों की कृपा आप पर बनी रहेगी। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से.... 
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राधा रानी को प्रसन्न करने के लिए करें श्रीराधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र का पाठ - फोटो : iStock
कहा जाता है कि श्रीराधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र के रचियता स्वयं महादेव हैं। पौराणिक मान्यता है कि श्रीराधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र का नियमित पाठ करने से राधा रानी और श्रीकृष्ण की असीम कृपा प्राप्त होती है। साथ ही इससे व्यक्ति के सारे पाप भी कट जाते हैं। इस पाठ को बेहद लाभकारी बताया गया है। कहा जाता है कि ये पाठ समस्त सांसारिक इच्छाओं को पूरा करने में सक्षम है। 
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राधा रानी को प्रसन्न करने के लिए करें श्रीराधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र का पाठ - फोटो : iStock
धार्मिक मान्यता है कि राधा रानी को प्रसन्न करने के लिए महादेव ने ये स्तोत्र माता पार्वती को सुनाया था। महादेव ने इस स्तोत्र के जरिए राधा रानी के शृंगार, रूप और करुणा का बखान किया है। रोजाना इसका पाठ करने से प्रभु की कृपा बनी रहती है। हालांकि कुछ लोग इसका पाठ रोजाना नहीं कर पाते। ऐसे में आप चाहें तो विशेष तिथियों जैसे अष्टमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी और पूर्णिमा तिथि पर कर सकते हैं। 

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राधा रानी को प्रसन्न करने के लिए करें श्रीराधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र का पाठ - फोटो : iStock
पौराणिक कथाओं में श्रीराधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र को मुक्ति का साधन माना गया है। कहा जाता है कि इसके जरिए कलयुग में भी व्यक्ति राधा और कृष्ण के दर्शन प्राप्त कर सकता है। लेकिन इसके लिए आपको गोवर्धन के पास स्थित राधाकुंड में खड़े होकर इस स्तोत्र का पाठ करना होगा। 
 
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राधा रानी को प्रसन्न करने के लिए करें श्रीराधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र का पाठ - फोटो : iStock
श्रीराधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र

राधा साध्यम साधनं यस्य राधा, मंत्रो राधा मन्त्र दात्री च राधा,
सर्वं राधा जीवनम् यस्य राधा, राधा राधा वाचिकिम तस्य शेषम। 
मुनीन्दवृन्दवन्दिते त्रिलोकशोकहारिणी, प्रसन्नवक्त्रपंकजे निकंजभूविलासिनी,
व्रजेन्दभानुनन्दिनी व्रजेन्द सूनुसंगते, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष-भाजनम् (1)
अशोकवृक्ष वल्लरी वितानमण्डपस्थिते, प्रवालज्वालपल्लव प्रभारूणाङि्घ् कोमले,
वराभयस्फुरत्करे प्रभूतसम्पदालये, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष-भाजनम्। (2)
अनंगरंगमंगल प्रसंगभंगुरभ्रुवां, सुविभ्रम ससम्भ्रम दृगन्तबाणपातनैः,
निरन्तरं वशीकृत प्रतीतनन्दनन्दने, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष भाजनम्। (3)
तड़ित्सुवणचम्पक प्रदीप्तगौरविगहे, मुखप्रभापरास्त-कोटिशारदेन्दुमण्ङले,
विचित्रचित्र-संचरच्चकोरशावलोचने, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष भाजनम्। (4)
मदोन्मदातियौवने प्रमोद मानमणि्ते, प्रियानुरागरंजिते कलाविलासपणि्डते,
अनन्यधन्यकुंजराज कामकेलिकोविदे, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष-भाजनम्।  (5)
अशेषहावभाव धीरहीर हार भूषिते, प्रभूतशातकुम्भकुम्भ कुमि्भकुम्भसुस्तनी,
प्रशस्तमंदहास्यचूणपूणसौख्यसागरे, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष भाजनम्। (6)
मृणालबालवल्लरी तरंगरंगदोलते, लतागलास्यलोलनील लोचनावलोकने,
ललल्लुलमि्लन्मनोज्ञ मुग्ध मोहनाश्रये, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष भाजनम्। (7)
सुवर्ण्मालिकांचिते त्रिरेखकम्बुकण्ठगे, त्रिसुत्रमंगलीगुण त्रिरत्नदीप्तिदीधिअति,
सलोलनीलकुन्तले प्रसूनगुच्छगुम्फिते, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष भाजनम्।  (8)
नितम्बबिम्बलम्बमान पुष्पमेखलागुण, प्रशस्तरत्नकिंकणी कलापमध्यमंजुले,
करीन्द्रशुण्डदण्डिका वरोहसोभगोरुके, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष भाजनम्। (9)
अनेकमन्त्रनादमंजु नूपुरारवस्खलत्, समाजराजहंसवंश निक्वणातिग,
विलोलहेमवल्लरी विडमि्बचारूचं कमे, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष-भाजनम्। (10)
अनन्तकोटिविष्णुलोक नमपदमजाचिते, हिमादिजा पुलोमजा-विरंचिजावरप्रदे,
अपारसिदिवृदिदिग्ध -सत्पदांगुलीनखे, कदा करिष्यसीह मां कृपा -कटाक्ष भाजनम्। (11)
मखेश्वरी क्रियेश्वरी स्वधेश्वरी सुरेश्वरी, त्रिवेदभारतीयश्वरी प्रमाणशासनेश्वरी,
रमेश्वरी क्षमेश्वरी प्रमोदकाननेश्वरी, ब्रजेश्वरी ब्रजाधिपे श्रीराधिके नमोस्तुते।  (12)
इतीदमतभुतस्तवं निशम्य भानुननि्दनी, करोतु संततं जनं कृपाकटाक्ष भाजनम्,
भवेत्तादैव संचित-त्रिरूपकमनाशनं, लभेत्तादब्रजेन्द्रसूनु मण्डलप्रवेशनम्। (13)
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