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Rangbhari Ekadashi 2026: रंगभरी एकादशी आज, चार शुभ योगों से बनेगा दुर्लभ संयोग

Fri, 27 Feb 2026 01:23 AM IST
Shweta Singh धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Rangbhari Ekadashi: आज रंगभरी एकादशी फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी है, जिसे आमलकी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव माता पार्वती को पहली बार काशी लेकर गए थे। 
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रंगभरी एकादशी 2026 - फोटो : amar ujala

Kab Hai RangBhari Ekadashi: आज यानि 27 फरवरी को फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। आज का दिन रंगभरी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। हिंदू धर्म में इसे आमलकी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। यह एकादशी इसलिए विशेष मानी जाती है क्योंकि इस दिन केवल भगवान विष्णु की ही नहीं, बल्कि भगवान शिव और माता पार्वती की भी पूजा की जाती है।
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मान्यता है कि भगवान शिव ने इसी तिथि पर माता पार्वती का ‘गौना’ कराया था और उन्हें पहली बार काशी लेकर आए थे। इस दिन की पूजा और व्रत करने से आध्यात्मिक लाभ के साथ-साथ जीवन में सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति भी होती है। आइए आगे विस्तार से जानते हैं रंगभरी एकादशी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।
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रंगभरी एकादशी - फोटो : अमर उजाला

रंगभरी एकादशी 2026 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 27 फरवरी को देर रात 12:33 बजे से प्रारंभ होगी और उसी दिन रात 10:32 बजे इसका समापन होगा। तिथि के अनुसार रंगभरी एकादशी का व्रत 27 फरवरी को ही रखा जाएगा। इसी दिन श्रद्धालु व्रत का संकल्प लेकर भगवान विष्णु, भगवान शिव और माता पार्वती की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करेंगे।

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रंगभरी एकादशी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

रंगभरी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त
रंगभरी एकादशी के दिन पूजा के लिए अभिजीत मुहूर्त को अत्यंत शुभ माना जाता है। यह मुहूर्त दोपहर 12:16 बजे से 1:02 बजे तक रहेगा। इस समय में पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त भी पूजा-अर्चना के लिए बहुत पवित्र समय माना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:17 बजे से 6:05 बजे तक रहेगा। इस दौरान भगवान की आराधना करने से आध्यात्मिक शांति और पुण्य की प्राप्ति होती है।

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रंगभरी एकादशी 2026 - फोटो : अमर उजाला

रंगभरी एकादशी 2026 पारण का समय
रंगभरी एकादशी व्रत का पारण 28 फरवरी को सुबह 6:47 बजे से 9:06 बजे के बीच किया जा सकता है। शास्त्रों के अनुसार एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना शुभ माना जाता है। पारण करने से पूर्व पूजा-पाठ और दान आदि करना उत्तम रहता है।

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रंगभरी एकादशी 2026 - फोटो : मंदिर प्रशासन
रंगभरी एकादशी 2026 पूजन विधि
  • इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ, विशेष रूप से पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
  • इसके बाद एक साफ चौकी पर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें।
  • पूजा के दौरान चंदन, बिल्वपत्र, भांग, धतूरा और पुष्प अर्पित करें। भगवान को मिठाई का भोग लगाएं और माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री अर्पित करें।
  • शिव-पार्वती को गुलाबी गुलाल अर्पित कर सुहाग और सौभाग्य की कामना करें।
  • भगवान विष्णु की भी विधिपूर्वक पूजा करें और आंवले का फल अर्पित करें।
  • आंवले के पेड़ की पूजा कर घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
  • भगवान शिव को खीर का भोग और ठंडाई अर्पित करें।
  • अंत में एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। शिव चालीसा का पाठ करें और आरती के साथ पूजा संपन्न करें।

 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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