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Amalaki Ekadashi 2026: कल आमलकी एकादशी पर जरूर करें ये 7 काम, श्री हरि होंगे प्रसन्न

Thu, 26 Feb 2026 06:29 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Amalaki Ekadashi 2026: 27 फरवरी को आमलकी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इस दिन आंवले के वृक्ष की विशेष पूजा का विधान है और साथ ही आंवले के दान को भी अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। आइए जानते हैं इस दिन कौन से कार्य जरूर करने चाहिए।
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आमलकी एकादशी 2026 उपाय - फोटो : Amar Ujala
Amalaki Ekadashi 2026 Upay In Hindi: फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी 27 फरवरी को पड़ रही है, जिसे आमलकी या आंवला एकादशी के नाम से जाना जाता है। फाल्गुन महीने में आने के कारण यह हिंदी पंचांग की अंतिम एकादशी मानी जाती है। इस दिन आंवले के वृक्ष की विशेष पूजा का विधान है और साथ ही आंवले के दान को भी अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को विधि-विधान से करने पर अनेक यज्ञों के बराबर फल प्राप्त होता है।

आंवले के पेड़ का महत्व
इस व्रत में भगवान विष्णु की पूजा के साथ आंवले के पेड़ का पूजन करना अनिवार्य माना गया है। हिंदू धर्म में आंवला वृक्ष को अत्यंत पवित्र और पूजनीय माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन आंवले का सेवन करने से स्वास्थ्य लाभ मिलता है और रोगों से रक्षा होती है। 
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आमलकी एकादशी पर जरूर करें ये काम - फोटो : adobe stock
आमलकी एकादशी पर जरूर करें ये काम
  • इस दिन शाम के समय तुलसी के पास दीपक अवश्य जलाना चाहिए। 
  • भगवान विष्णु की पूजा करते हुए “ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करना शुभ माना गया है। 
  • भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक कर “कृं कृष्णाय नम:” मंत्र का जाप भी किया जा सकता है। 
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आंवला - फोटो : Adobe Stock
  • श्रीकृष्ण के साथ गौ माता की पूजा करना और किसी गौशाला में सेवा या दान देना भी पुण्यदायक माना गया है।
  • मंदिर में पूजन सामग्री जैसे कुमकुम, चंदन, पुष्प, मिठाई, तेल-घी या वस्त्र आदि का दान करना शुभ फलदायी होता है। 
  • इस दिन आंवले का सेवन अवश्य करना चाहिए, चाहे फल के रूप में हो या रस के रूप में। आंवले का दान भी विशेष महत्व रखता है। 
  • इसके अतिरिक्त माता अन्नपूर्णा की पूजा कर जरूरतमंद लोगों को अन्न दान करना भी अत्यंत शुभ माना गया है।

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पूजा विधि - फोटो : adobe stock
पूजा विधि
  • प्रातःकाल उठकर भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। 
  • स्नान के बाद विधिपूर्वक विष्णु पूजा करें और दीप प्रज्वलित कर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। 
  • पूजा के उपरांत आंवले के वृक्ष के नीचे कलश स्थापित करें और धूप, दीप, चंदन, रोली, अक्षत तथा पुष्प अर्पित कर पूजन करें। 
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पूजा विधि - फोटो : adobe stock
  • इसके बाद किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराएं।
  • अगले दिन स्नान और पूजा के पश्चात कलश, वस्त्र तथा आंवला दान करें और फिर व्रत का पारण कर भोजन ग्रहण करें। 
  • श्रद्धा और नियम के साथ किया गया यह व्रत विशेष फल प्रदान करने वाला माना गया है।

 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 

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