रोजेदारों के लिए कुछ अहम नियम
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रोजेदारों के लिए कुछ अहम नियम और हिदायतें
- यदि कोई मुस्लिम यात्रा पर है और तय दूरी (शरई हद) के अनुसार मुसाफिर माना जाता है, तो उसे रोज़ा न रखने की इजाज़त है। हालांकि बाद में छूटे हुए रोज़ों की क़ज़ा पूरी करना जरूरी होता है।
- अगर कोई पुरुष या महिला बीमार है और रोज़ा रखने से सेहत को नुकसान पहुंच सकता है, तो उसे रोज़ा न रखने की छूट दी गई है। स्वस्थ होने के बाद वे छूटे रोज़े पूरे कर सकते हैं।
- रमजान रहमत और हमदर्दी का महीना है। भूखे को खाना खिलाना, गरीबों और बेघर लोगों की मदद करना बहुत सवाब का काम माना गया है। इससे रोज़े की रूह और ज्यादा मजबूत होती है।
- ईद-उल-फितर की नमाज़ से पहले ज़कात-उल-फितर (फितरा) अदा करना जरूरी माना गया है, ताकि जरूरतमंद लोग भी ईद की खुशी में शामिल हो सकें। जिन पर ज़कात फ़र्ज़ है, उन्हें रमजान में इसे अदा करने का खास ख्याल रखना चाहिए।
- अगर कोई व्यक्ति ऐसी स्थायी मजबूरी (जैसे बुजुर्ग या लाइलाज बीमारी) की वजह से रोज़ा नहीं रख सकता, तो वह हर छूटे रोज़े के बदले एक गरीब व्यक्ति को खाना खिलाए।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।