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साल में 2 बार होती है यह एकादशी, संतान सुख के लिए जरूर करें उपवास, जानें व्रत विधि और कथा

Sun, 05 Jan 2020 04:12 PM IST
योगेश जोशी धर्म डेस्क, अमर उजाला
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पौष महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहते है। इस बार यह एकादशी 06 जनवरी को पड़ रही है। पुत्रदा एकादशी साल में दो बार आती है। पहली पौष माह में जबकि दूसरी सावन में। इस एकादशी में भगवान विष्णु के बाल रूप की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस एकादशी के पुण्य से संतान सुख की प्राप्ति होती है। इस एकादशी का पुण्यफल संतान के भाग्य और कर्म को उत्तम बनाने में सहायक माना गया है। जिस किसी भी दंपत्ति को संतान प्राप्ति करने में दिक्कत आती है उसको यह व्रत जरूर करना चाहिए।
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व्रत विधि
  • व्रत रखने वाले को दशमी के दिन लहसुन, प्याज से रहित शुद्घ भोजन करना चाहिए। एकादशी के दिन प्रातः स्नानादि से निवृत होकर श्री नारायण की भक्ति पूर्वक पूजा करनी चाहिए और दीपदान करना चाहिए। व्रत रखने वाले को दशमी के दिन से ही मन और वचन से ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए भगवान का ध्यान करते हुए अपना काम करना चाहिए।
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जो व्यक्ति यह व्रत रखता है उसे एकादशी के दिन पूरे दिन निराहार रहना होता है। शाम को चाहें तो फलाहार कर सकते हैं। द्वादशी के दिन ब्राह्मण को भोजन करवाकर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद स्वयं भोजन करें ऐसा नियम है। द्वादशी के दिन भी व्रती को सात्विक भोजन करना चाहिए। इस प्रकार नियमपूर्वक जो लोग पुत्रदा एकादशी का व्रत करते हैं उनका व्रत ही सफल होता है।

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पुत्रदा एकादशी व्रत की कथा
  • एक समय भद्रावतीपुरी में राजा सुकेतुमान राज्य करते थे। उनकी रानी का नाम चम्पा था। विवाह के काफी समय बाद भी पति-पत्नी संतान सुख से वंचित थे। एक दिन दुःखी होकर राजा सुकेतुमान किसी से कुछ बताये बिना वन चले गये। वन में इन्हें एक सुन्दर सरोवार के पास कुछ मुनि दिखाई पड़े। राजा मुनियों के पास पहुंचे और उन्हें प्रणाम किया। मुनियों ने बताया कि वह विश्वदेव हैं।
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राजा ने विश्वदेव से संतानहीनता का दुःख बताया और इसका उपचार पूछा। मुनियों ने राजा से कहा कि आपने बड़े ही शुभ दिन पर यह प्रश्न किया है, आज पौष शुक्ल एकादशी तिथि है। इस एकादशी का नाम पुत्रदा एकादशी है। इस व्रत के पुण्य से सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है। इसके बाद मुनियों द्वारा बताये गये विधि से राजा ने पुत्रदा एकादशी व्रत रखा। इसके पुण्य से कुछ समय बाद रानी चम्पा गर्भवती हुई और एक नियत समय पर सुन्दर पुत्र को जन्म दिया। बड़ा होकर राजा का यह पुत्र धर्मात्मा और प्रजापालक हुआ।
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