राजा ने विश्वदेव से संतानहीनता का दुःख बताया और इसका उपचार पूछा। मुनियों ने राजा से कहा कि आपने बड़े ही शुभ दिन पर यह प्रश्न किया है, आज पौष शुक्ल एकादशी तिथि है। इस एकादशी का नाम पुत्रदा एकादशी है। इस व्रत के पुण्य से सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है। इसके बाद मुनियों द्वारा बताये गये विधि से राजा ने पुत्रदा एकादशी व्रत रखा। इसके पुण्य से कुछ समय बाद रानी चम्पा गर्भवती हुई और एक नियत समय पर सुन्दर पुत्र को जन्म दिया। बड़ा होकर राजा का यह पुत्र धर्मात्मा और प्रजापालक हुआ।