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Pradosh Vrat May 2021: 24 मई को सोम प्रदोष व्रत, इस विधि से करें शिव आराधना

Wed, 19 May 2021 05:39 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रदोष व्रत 2021 - फोटो : अमर उजाला
वैशाख माह में सोम प्रदोष व्रत 24 मई 2021 को रखा जाएगा। दरअसल, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का प्रदोष व्रत सोमवार के दिन पड़ रहा है। सोमवार का दिन और प्रदोष व्रत दोनों का संबंध भगवान शिव से है। ऐसे में यह प्रदोष व्रत और भी ज्यादा शुभफलदाई रहेगा। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान है। प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल यानी संध्या के समय की जाती है। प्रदोष व्रत में फलाहार या निर्जला रहकर व्रत किया जाता है। जानते हैं सोम प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त, महत्व और व्रत पूजा विधि।
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प्रदोष व्रत 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
सोम प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त
त्रयोदशी तिथि आरंभ - 24 मई 2021 तड़के 03 बजकर 38 मिनट से
त्रयोदशी तिथि समाप्त - 25 मई 2021 रात 12 बजकर 11 मिनट
पूजा का समय - शाम 07 बजकर 10 मिनट से रात 09 बजकर 13 मिनट तक
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प्रदोष व्रत की विधि - फोटो : सोशल मीडिया
प्रदोष व्रत पूजा विधि
प्रदोष व्रत करने के लिए त्रयोदशी के दिन जल्दी सुबह उठकर सबसे पहले स्नान करें। भगवान शिव को जल चढ़ाकर भगवान शिव का मंत्र जपें। इसके बाद पूरे दिन निराहार रहते हुए प्रदोषकाल में भगवान शिव को शमी, बेल पत्र, कनेर, धतूरा, चावल, फूल, धूप, दीप, फल, पान, सुपारी आदि चढ़ाएं।

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भगवान शिव (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
भगवान शिव के मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥ 
ॐ नमः शिवाय। ॐ आशुतोषाय नमः।
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भगवान शिव (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
प्रदोष व्रत का महत्व
प्रदोष व्रत भगवान शिव के साथ चंद्रदेव से भी जुड़ा है। मान्यता है कि प्रदोष का व्रत सबसे पहले चंद्रदेव ने ही किया था। माना जाता है शाप के कारण चंद्र देव को क्षय रोग हो गया था। तब उन्होंने हर माह में आने वाली त्रयोदशी तिथि पर भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत रखना आरंभ किया था। जिसके शुभ प्रभाव से चंद्रदेव को क्षय रोग से मुक्ति मिली थी। 
 
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भगवान शिव - फोटो : Pixabay
पौराणिक मान्यता
पौराणिक मान्यता के अनुसार प्रदोष व्रत करने वाले साधक पर सदैव भगवान शिव की कृपा बनी रहती है और उसका दु:ख दारिद्रता दूर होती है और कर्ज से मुक्ति मिलती है। प्रदोष व्रत में शिव संग शक्ति यानी माता पार्वती की पूजा की जाती है, जो साधक के जीवन में आने वाली सभी बाधाओं को दूर करते हुए उसका कल्याण करती हैं।
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