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Pradosh Vrat 2023: ज्येष्ठ मास का पहला प्रदोष आज,जानें शुभ मुहूर्त, योग, महत्व और पूजा विधि

Wed, 17 May 2023 11:26 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Budh Pradosh Vrat 2023 - फोटो : amar ujala
Pradosh Vrat 2023 Jyeshtha Month: ज्येष्ठ माह आरम्भ हो चुका है। आज यानी 17 मई को ज्येष्ठ माह का पहला प्रदोष व्रत है। आज बुधवार होने के कारण यह प्रदोष बुध प्रदोष कहलाएगा । पंचांग के अनुसार यह पर्व प्रत्येक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है। इस दिन देवों के देव महादेव और आदिशक्ति मां पार्वती की पूजा उपासना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष व्रत करने वाले साधक को त्रिलोकीनाथ और मां पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है। उनकी कृपा से साधक के जीवन में व्याप्त समस्त दुखों का नाश होता है। साथ ही व्रती के घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है।  आज पंचक और भद्रा भी लगी है । लेकिन इसके साथ ही यानी बुध प्रदोष के दिन आयुष्मान और सौभाग्य जैसे शुभ योग भी बन रहे हैं। आइये जानते हैं प्रदोष की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में। 
 
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Budh Pradosh Vrat 2023 - फोटो : iStock
बुध प्रदोष की तिथि 
कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि आरम्भ: 16 मई, मंगलवार, रात्रि 11:36 मिनट से 
कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि  समाप्त: 17 मई, बुधवार, रात्रि 10: 28 मिनट पर 
प्रदोष पूजा मुहूर्त और उदयातिथि के आधार पर प्रदोष व्रत 17 मई बुधवार को है। 
बुधवार दिन को होने के कारण यह बुध प्रदोष व्रत है।
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Budh Pradosh Vrat 2023
बुध प्रदोष 2023 पूजा मुहूर्त
बुध प्रदोष की पूजा का शुभ मुहूर्त: 17 मई, बुधवार, सायं 07: 06 मिनट से- रात्रि  09:10 मिनट तक 
प्रदोष पूजा का शुभ उत्तम मुहूर्त: 17 मई, बुधवार, रात्रि 08: 24 मिनट से-रात्रि 09:10 मिनट तक 

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Budh Pradosh Vrat 2023
शुभ योग में प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत के दिन आयुष्मान और सौभाग्य दो शुभ योग बन रहे हैं। 
आयुष्मान योग प्रारंभ: 17 मई, प्रातः काल से रात्रि 09:18 मिनट तक
सौभाग्य योग प्रारंभ: 17 मई, रात्रि 09:18  से अहोरात्र 
ये दोनों ही योग पूजा पाठ और शुभ कार्यों के लिए उत्तम माने जाते हैं।
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Budh Pradosh Vrat 2023 - फोटो : iStock
पंचक और भद्रा में प्रदोष व्रत
आज बुध प्रदोष व्रत के दिन पंचक और भद्रा भी लगी है। 
पंचक: प्रातः  05:29 से  प्रातः 07:39 मिनट तक है. 
भद्रा:  रात्रि 10:28 मिनट से 18 मई, गुरुवार, प्रात: 05:29 मिनट तक
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Budh Pradosh Vrat 2023 - फोटो : iStock
प्रदोष व्रत का महत्व
दीर्घायु,शांति और सौभाग्य की प्रार्थना के लिए बुध प्रदोष के दिन लोग व्रत रखते हैं। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्रदोष व्रत रखने वाले अपने पिछले और वर्तमान के सभी पापों से मुक्त हो जाते हैं। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शंकर ने चंद्र देव को एक राजा के श्राप से मुक्त कराया था। यदि व्रत को 'श्रद्धा  के साथ रखा जाता है और दिन के सभी अनुष्ठानों का पालन पूरी लग्न से किया जाता है , तो भगवान महादेव भक्त के कष्टों को समाप्त करते हैं और उसे स्वास्थ्य, धन और बुद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
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Budh Pradosh Vrat 2023 - फोटो : amar ujala
बुध प्रदोष व्रत की पूजा विधि
  • प्रदोष व्रत के दिन सुबह उठकर स्नान आदि कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • इसके बाद मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल अर्पित करें या रुद्राभिषेक करें । 
  • रुद्राभिषेक के लिए गंगाजल, गाय का दूध, भांग, धतूरा, बेलपत्र, चंदन, शमी के पत्ते, शहद और अक्षत अर्पित करें। 
  • प्रदोष व्रत में शाम को भगवान शिव का पूजन किया जाता है। सायंकाल में  भोलेनाथ और माता पार्वती के समक्ष  घी का दीपक जलाएं और धूप करें। 
  • इसके बाद फूल व मिठाई अर्पित करें। 
  • फिर प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें और आरती करें। 
  • इस दिन शिव चालीसा पढ़ना भी फलदायी होता है। 
  • महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति और घर में सुख-समृद्धि की कामना से प्रदोष व्रत रखती हैं।
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