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पितृ पक्ष 2026: आज से शुरू हुआ पितृ पक्ष, नोट कर लें तर्पण की सामग्री और कुश का महत्व

Sat, 26 Sep 2026 10:55 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष की शुरुआत हो चुकी है। इस दौरान पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध करने की परंपरा है। जानें तर्पण के लिए जरूरी सामग्री और धार्मिक मान्यताओं में कुश के महत्व के बारे में।
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तर्पण सामग्री - फोटो : amar ujala
Pitru Paksha 2026: सनातन परंपरा में पितृ पक्ष को पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इस अवधि में पितरों की शांति और तृप्ति के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान जैसे धार्मिक कर्म किए जाते हैं। 26 सितंबर से शुरू हो रहे पितृ पक्ष के दौरान तर्पण करते समय सही सामग्री का इस्तेमाल और विधि का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में तर्पण के दौरान कुश का भी विशेष महत्व बताया गया है। आइए जानते हैं पितृ तर्पण में किन चीजों की आवश्यकता होती है और कुश को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है।
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पितृ कर्म में कुशा यानी कुश घास को विशेष स्थान दिया गया है।

तर्पण में कुशा का क्यों है महत्व?
पितृ कर्म में कुशा यानी कुश घास को विशेष स्थान दिया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे पवित्र माना जाता है और तर्पण की प्रक्रिया में इसका प्रयोग शुभ माना जाता है। तर्पण से पहले कुश से बनी पवित्री को अनामिका अंगुली में धारण करने की परंपरा है। मान्यता है कि कुश धारण करके पितरों को जल अर्पित करने से तर्पण कर्म की पवित्रता बनी रहती है। इसी वजह से श्राद्ध और तर्पण से जुड़े कई धार्मिक अनुष्ठानों में कुश का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, कुश के धार्मिक महत्व से जुड़ी मान्यताएं परंपरा और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।

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तर्पण करते समय इन बातों का रखें ध्यान - फोटो : freepik

तर्पण करते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • धार्मिक परंपरा में पितरों के लिए तर्पण करते समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करने का विधान बताया गया है।
  • पितृ कर्म के लिए दिन के निर्धारित समय का विशेष महत्व माना जाता है। तर्पण से पहले स्थानीय पंचांग के अनुसार सही समय देख लेना चाहिए।
  • तर्पण करते समय मन को शांत रखते हुए पूर्वजों का स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करना चाहिए।
  • धार्मिक मान्यता है कि पितृ कर्म शांत और सात्विक भाव से करना चाहिए। इसलिए तर्पण के दौरान मन में क्रोध या नकारात्मक भाव रखने से बचें।
  • जल अर्पित करते समय जिन पूर्वजों के निमित्त तर्पण किया जा रहा है, उनका श्रद्धापूर्वक स्मरण करना परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
  • पितृ पक्ष में तर्पण श्रद्धा और नियम के साथ करने की परंपरा है। परिवार की परंपरा और स्थानीय धार्मिक विधि के अनुसार कर्म करना उचित माना जाता है।

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तर्पण के लिए जरूरी सामग्री - फोटो : adobe stock

तर्पण के लिए जरूरी सामग्री

  • स्वच्छ जल
  • तांबे या पीतल का पात्र
  • काले तिल
  • जौ
  • कच्चा दूध
  • अक्षत यानी साबुत चावल
  • सफेद फूल
  • चंदन
  • कुशा घास
  • कुश से बनी पवित्री
  • आसन
  • साफ कपड़ा
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मान्यता है कि कुश धारण करके पितरों को जल अर्पित करने से तर्पण कर्म की पवित्रता बनी रहती है। - फोटो : freepik

तर्पण में कुशा का महत्व
पितृ कर्म में कुशा यानी कुश घास को विशेष स्थान दिया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे पवित्र माना जाता है और तर्पण की प्रक्रिया में इसका प्रयोग शुभ माना जाता है। तर्पण से पहले कुश से बनी पवित्री को अनामिका अंगुली में धारण करने की परंपरा है। मान्यता है कि कुश धारण करके पितरों को जल अर्पित करने से तर्पण कर्म की पवित्रता बनी रहती है। इसी वजह से श्राद्ध और तर्पण से जुड़े कई धार्मिक अनुष्ठानों में कुश का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, कुश के धार्मिक महत्व से जुड़ी मान्यताएं परंपरा और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।

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तर्पण पूजा विधि - फोटो : Amar Ujala

तर्पण पूजा विधि

  • तर्पण करने से पहले स्नान करके साफ और स्वच्छ कपड़े पहनें। पूजा के स्थान को भी अच्छी तरह साफ कर लें और शांत मन से तर्पण की तैयारी करें।
  • पितरों के निमित्त तर्पण करते समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठने की धार्मिक परंपरा है। इसके बाद स्वच्छ आसन पर बैठकर पूजा की सामग्री अपने पास रखें।
  • तांबे या पीतल के पात्र में साफ जल लें। परंपरा के अनुसार इसमें काले तिल, जौ और थोड़ा कच्चा दूध मिलाया जाता है। तर्पण के लिए इस्तेमाल होने वाली सामग्री पहले से तैयार रखें।
  • तर्पण से पहले कुशा की पवित्री धारण करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में कुशा को पवित्र माना गया है और पितृ कर्म में इसका विशेष महत्व बताया गया है।
  • जिन पूर्वजों के निमित्त तर्पण किया जा रहा है, उनका श्रद्धापूर्वक स्मरण करें। नाम और गोत्र की जानकारी हो तो संकल्प लेते समय उसका उल्लेख किया जा सकता है।
  • हाथ में तर्पण का जल लेकर धार्मिक विधि के अनुसार पितरों को अर्पित करें। जल अर्पित करते समय मन में श्रद्धा रखें और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें।
  • तर्पण के दौरान मन को शांत रखें और क्रोध या किसी तरह के नकारात्मक भाव से बचें। पितृ कर्म को श्रद्धा और एकाग्रता के साथ करने की परंपरा है।
  • तर्पण पूरा होने के बाद पितरों की शांति और परिवार के कल्याण के लिए प्रार्थना करें। तर्पण की विधि परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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