श्राद्ध कर्म के लिए मुख्य काल और शुभ मुहूर्त
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श्राद्ध कर्म के लिए मुख्य काल और शुभ मुहूर्त
शास्त्रों (जैसे निर्णय सिंधु और मत्स्य पुराण) के अनुसार श्राद्ध कर्म, पिंडदान, तर्पण और ब्राह्मण भोजन कराने के लिए दिन का विशेष समय तय किया गया है। यदि इन मुहूर्तों के दौरान 'गजछाया योग' बनता है, तो इसे अत्यंत दुर्लभ और अक्षय फलदायी संयोग माना जाता है।
1. कुतुप काल (8वाँ मुहूर्त)
कुतुप काल दिन का 8वाँ मुहूर्त होता है। पापों का शमन करने के कारण इसे 'कुतुप' नाम दिया गया है।
समय: आमतौर पर यह दोपहर 11:30 बजे से 12:30 बजे के मध्य रहता है।
महत्व: श्राद्ध कर्म का संकल्प लेने और तर्पण की शुरुआत करने के लिए कुतुप काल को सबसे उत्तम समय माना जाता है।