पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए निर्धारित समय
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पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए निर्धारित समय
सनातन धर्म में पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए एक पखवाड़े का समय निर्धारित किया गया है। जब हम अपने पूर्वजों को याद करते हुए उनके लिए तर्पण करते हैं और पिंडदान करते हैं। ऐसा करने से हमारे पितरों की आत्मा तृप्त और प्रसन्न होकर हमें सदा सुखी और खुशहाल रहने का आशीर्वाद देती है इसलिए अपने पूर्वज पितरों के प्रति श्रद्धा भावना रखते हुए आश्विन कृष्ण पक्ष में पितृ- तर्पण और श्राद्ध कर्म करना नितान्त आवश्यक है। इससे स्वास्थ्य, समृद्धि, आयु, सुख- शान्ति, वंशवृद्धि एवं उत्तम सन्तान की प्राप्ति होती है। श्रद्धापूर्वक किए जाने के कारण ही इसका नाम 'श्राद्ध' है। इस बात का भी ध्यान रहे कि श्राद्धकृत्य 'अपराह्नकाल' व्यापिनी तिथि में किए जाते हैं।
श्राद्ध की तिथियां-
26 सितंबर, शनिवार पूर्णिमा श्राद्ध
27 सितंबर, रविवार प्रतिपदा श्राद्ध
28 सितंबर, सोमवार द्वितीया श्राद्ध
29 सितंबर, मंगलवार तृतीया श्राद्ध
30 सितंबर, बुधवार चतुर्थी श्राद्ध
1 अक्तूबर, गुरुवार पंचमी/ षष्ठी श्राद्ध (पंचमी तिथि दोपहर 12:35 बजे तक इसके पश्चात षष्ठी तिथि)
2 अक्तूबर, शुक्रवार सप्तमी श्राद्ध
3 अक्तूबर. शनिवार अष्टमी श्राद्ध
4 अक्तूबर, रविवार नवमी श्राद्ध
5 अक्तूबर, सोमवार दशमी श्राद्ध
6 अक्तूबर, मंगलवार एकादशी श्राद्ध
7 अक्तूबर, बुधवार द्वादशी श्राद्ध
8 अक्तूबर, गुरुवार त्रियोदशी श्राद्ध
9 अक्तूबर, शुक्रवार चतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्तूबर, सर्वपितृ अमावस्या
ज्योतिषाचार्य पं.मनोज कुमार द्विवेदी