पितृ पक्ष
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क्या कौवा न आने से सच में श्राद्ध अधूरा रह जाता है?
यह एक लोक-मान्यता है, जिसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी परिवारों में दोहराया जाता रहा है, लेकिन इसका कोई सख्त शास्त्रीय आधार नहीं है। धार्मिक दृष्टि से श्राद्ध कर्म की पूर्णता तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और विधिपूर्वक मंत्रोच्चार से होती है। कौवे का भोजन ग्रहण करना एक शुभ संकेत जरूर माना जाता है, जो यह दर्शाता है कि पितृ प्रसन्न हुए हैं, लेकिन इसका न होना श्राद्ध को अमान्य या निष्फल नहीं बनाता। पंडितों और शास्त्रों के अनुसार, यदि श्रद्धा और विधि-विधान के साथ पूरा कर्मकांड संपन्न किया जाए, तो श्राद्ध पूर्ण माना जाता है, भले ही कौवा न आए।