भगवान विष्णु ने भी यह देखर गयासुर को वरदान दिया कि यह स्थान गयाजी के नाम से जाना जाएगा और जो भी व्यक्ति यहां पिंडदान करेगा, उसके पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होगी।
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पौराणिक कथा
गया जी में पिंडदान करने के पीछे एक कथा है जिसके अनुसार ब्रह्माजी ने गयासुर नाम के असुर को वरदान दिया था कि वह इतना पवित्र हो जाएगा कि उसके दर्शन मात्र से ही लोग पाप से मुक्त हो जाएंगे। वरदान मिलने के बाद गयासुर ने लोगों को मोक्ष देना शुरू कर दिया। यमराज उनके ऐसा करने से परेशान हो गए। यमराज देवताओं के पास पहुंचे और उनसे मदद मांगी।
यमराज की बात सुनने के बाद देवताओं ने एक युक्ति निकाली। वे सभी मिलकर गयासुर के पास गए और यज्ञ करने की अनुमति मांगी। गयासुरने देवताओं को अपने पीठ पर यज्ञ करने की अनुमति दे दी। जब देवताओं ने यज्ञ आरंभ किया तो गयासुर को अपमी पीठ पर भार महसूस होने लगा। लेकिन ब्रह्मा जी ने गयासुर को यज्ञ के दौरान हिलने से मना कर दिया।
जब गयासुर से भार सहा न गया तो उसने हिलने का प्रयास किया और ब्रह्मा जी ने उसके शरीर पर एक शिला रख दी जिसके नीचे गयासुर दब गया। इस शिला को अब धर्मशिला के नाम से जाना जाता है। भगवान विष्णु ने भी यह देखर गयासुर को वरदान दिया कि यह स्थान गयाजी के नाम से जाना जाएगा और जो भी व्यक्ति यहां पिंडदान करेगा, उसके पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होगी। इसी वजह सेगयाजी में मिलेगा। इसी वजह से गयाजी में पिंडदान को इतना महत्वपूर्ण माना जाता है।
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