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Pitru Paksha 2019: पितृपक्ष हो रहा है प्रारंभ, जानें कौन कर सकता है श्राद्ध कर्म

Tue, 10 Sep 2019 07:51 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क,अमर उजाला
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श्राद्ध
पितरों का पक्ष पितृपक्ष 13 सितंबर से प्रारंभ हो रहा है। 13 से 28 सितंबर तक पितरों के निमित श्राद्ध कर्म किए जाएंगे। धार्मिक ग्रंथो के अनुसार पारिवारिक कलयाण और पितरों कि आत्मशांति के लिए पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म करना चाहिए। विधि-पूर्वक श्राद्ध करने से पितर आशीर्वाद देते हैं।

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मान्यता है कि इन दिनों में वो हमारे बीच किसी ना किसी रूप में आते है और हमें आशीर्वाद देते है। इन दिनों किए गए दान-पुण्य का विशेष फल मिलता है। गाय को भोजन कराने का विशेष महत्त्व है। पुराणों के अनुसार हर कोई श्राद्ध कर्म नहीं कर सकता है। आज हम आपको बताएंगे कौन कर सकता है श्राद्ध कर्म।

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श्राद्ध वही पुरुष कर सकता है जिसका यज्ञोपवीत संस्कार हुआ हो। पिता का श्राद्ध कर्म पुत्र के हाथों ही किया जाना चाहिए। पुत्र नहीं है तो पत्नी भी श्राद्ध कर सकती है। अगर पत्नी भी नहीं है तो भाई भी श्राद्ध कर्म कर सकता है। इनमें से किसी के ना होने पर परिवार का कोई भी सदस्य तर्पण कर सकता है।

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एक से अधिक पुत्र होने पर सबसे बड़ा पुत्र श्राद्ध कर्म करता है। पुत्री का पति एवं पुत्री का पुत्र भी श्राद्ध कर्म कर सकते है। पुत्र के स्थान पर पौत्र और प्रपौत्र भी श्राद्ध कर सकते हैं। अगर पुत्र, पौत्र या प्रपौत्र नहीं है तो विधवा स्त्री भी श्राद्ध कर्म कर सकती है।

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अगर जातक का कोई पुत्र नहीं है तो वह पत्नी का श्राद्ध कर्म कर सकता है । पुत्र, पौत्र और पुत्री का पुत्र के न होने पर भतीजा भी श्राद्ध कर्म करने का अधिकार रखता है। गोद लिया हुआ पुत्र भी श्राद्ध कर्म करके पुण्य प्राप्त कर सकता हैं।
   
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