महाभारत के अनुसार, महर्षि निमि ने पितरों की आत्म शांति और पितृ ऋणों से मुक्ति का मार्ग महातप्सवी अत्रि से पूछा था तब उन्होंने महर्षि निमि को श्राद्ध पूजा के बारे में बताया। तत्पश्चात महर्षि निमि ने श्रद्धा पूजा प्रारंभ की और उनकी श्राद्ध पूजा से पितृ खुश होने लगे और उन्हें पितृ ऋण से मुक्ति मिल गई। महर्षि ने श्राद्ध पूजा के बारें में ऋषि मुनियो को ज्ञान दिया उन्होंने विस्तृत बताया कि किस तरह श्राद्ध पूजा से पितृ ऋण और दोषो से मुक्ति मिलती हैं । इसी तरह यह परंपरा आगे बढ़ने लगी और पितृ आत्माओं की शांति के लिए श्रद्धा पूजा होने लगी ।
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