ज्योतिषीय मान्यताओं में पितृ दोष और कालसर्प दोष को जीवन में आने वाली बाधाओं से जोड़कर देखा जाता है। भगवान शिव को महाकाल और नागों के स्वामी के रूप में पूजा जाता है, इसलिए मान्यता है कि शिव आराधना से इन दोषों की शांति के लिए विशेष साधना की जा सकती है। आइए जानते हैं इससे जुड़े मंत्र, पूजा विधि और आसान उपाय।
कालसर्प दोष निवारण का मंत्र और विधि
ज्योतिष के अनुसार राहु और केतु की विशेष स्थिति से कालसर्प दोष का निर्माण माना जाता है। नागपंचमी, सोमवार और अमावस्या जैसे अवसरों पर शिव पूजा और नाग आराधना करने की परंपरा है।
सर्प गायत्री मंत्र:
ॐ नवकुलाय विद्महे विषदन्ताय धीमहि तन्नो सर्पः प्रचोदयात।
शिव मंत्र:
ॐ नमः शिवाय राहवे केतवे नमः।
पूजा विधि:
स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और शिव मंदिर जाएं। शिवलिंग पर तांबे या चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा अर्पित करें। जल चढ़ाते हुए सर्प गायत्री मंत्र का 108 बार जाप करें। पूजा पूर्ण होने के बाद नाग-नागिन के जोड़े को मंदिर में दान करना उचित माना जाता है।