ब्रह्मा जी द्वारा प्रामाणिक विधि की मान्यता
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3. ब्रह्मा जी द्वारा प्रामाणिक विधि की मान्यता
सृष्टि के कालचक्र में वेदों का ज्ञान अनादि है, लेकिन जब बात इसे सामाजिक और भौतिक रूप देने की आई, तो निमि द्वारा अपनाई गई विधि को ही ब्रह्मा जी ने 'श्राद्ध की प्रामाणिक विधि' के रूप में मान्यता दी।
संक्षेप में कहें तो वेदों में मौजूद पितृ-यज्ञ जहाँ श्राद्ध का 'सैद्धांतिक रूप' था, वहीं महर्षि निमि ने इसे 'व्यावहारिक व संस्थागत रूप' दिया। इसी कारण वेदों में तर्पण का उल्लेख होते हुए भी पिण्डदान युक्त श्राद्ध परंपरा का पहला कर्ता महर्षि निमि को ही माना जाता है।
- शैली प्रकाश
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