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Parshuram Jayanti 2020: 26 अप्रैल को परशुराम जयंती, जानिए इनसे जुड़ी कुछ खास बातें

Sun, 19 Apr 2020 12:11 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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Parshuram Jayanti 2020
भगवान परशुराम विष्णुजी के छठे अवतार और सात चिरंजीवी में एक हैं, जो कलयुग के समय आज भी इस पृथ्वी पर मौजूद हैं। अक्षय तृतीया के दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था इसलिए इस दिन इनका जन्मोत्सव मनाया जाता है। 26 अप्रैल को अक्षय तृतीया और भगवान परशुराम जयंती दोनों मनाई जाएगी। भगवान परशुराम की जयंती के अवसर पर आइए जानते हैं उनसे जुड़ी हुई कुछ बातें...
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Parshuram Jayanti 2020
परशुराम का जन्म वैशाख माह की तृतीया तिथि के दिन और रात के पहले प्रहर में हुआ था। परशुराम भगवान विष्णु के अवतार है। इनके जन्म के समय को सतयुग और  त्रेतायुग का संधिकाल माना गया है। भगवान शिव के परमभक्त परशुराम को न्याय के देवता का अधिकार दिया है।
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Parshuram Jayanti 2020
परशुराम क्यों कहलाए
भगवान परशुराम के पिता का नाम मुनि जमदग्रि और माता का नाम रेणुका था। एक बार अपने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए उन्होंने अपनी माता की हत्या कर दी। इस कारण इनपर मातृ हत्या का पाप लगा था जिसका पश्चताप करने के लिए उन्होंने भगवान  शिव की आराधना की थी। इनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने परशु नाम का एक अस्त्र दिया था जिस कारण से इनका नाम परशुराम पड़ा।

 

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Parshuram Jayanti 2020
तोड़ा था भगवान गणेश का एक दांत
भगवान परशुराम क्रोधी स्वभाव के हैं। इसके संबंध में एक कथा मिलती है। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार जब परशुराम जी भगवान शिव के दर्शन करने के लिए कैलाश पर्वत पहुंचे तो भगवान गणेश जी उन्हें शिव से मुलाकात करने के लिए रोक दिया। इस बात से क्रोधित होकर उन्होंने अपने फरसे से भगवान गणेश का एक दांत तोड़ दिया था। जिसके बाद भगवान गणेश एकदंत कहलाने लगे।
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Lord Parshuram - फोटो : Social media
त्रेता और द्वापर दोनों युगों में रहें मौजूद
भगवान परशुराम त्रेता और द्वापर दोनों युग में मौजूद रहें। महाभारत में उन्होंने भगवान कृष्ण की लीला देखी तो वहीं त्रेता युग में भगवान राम की भी लीला देखी। भगवान श्री राम ने परशुराम जी को अपना सुदर्शन चक्र सौंपा था। वही सुदर्शन चक्र परशुराम जी ने द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण को वापस किया। 
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Lord Parshuram - फोटो : Social media
कर्ण को दिया श्राप
महाभारत काल में कुंती पुत्र कर्ण ने भगवान परशुराम से झूठ बोलकर उनसे शिक्षा ग्रहण की थी। भगवान परशुराम को जब यह बात मालूम हुई तो उन्होंने कर्ण को श्राप दिया कि जिस विद्या को उसने झूठ बोलकर प्राप्त की है, वही विद्या युद्ध के समय वह भूल जाएगा और कोई भी अस्त्र या शस्त्र नहीं चला पाएगा। भगवान परशुराम का यही श्राप अंतत: कर्ण की मृत्यु का कारण भी बना। 
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Lord Parshuram - फोटो : Social media
21 बार किया क्षत्रियों का नाश
भगवान परशुराम ने इस पृथ्वी को 21 बार क्षत्रियों से विहीन कर दिया था। इस संबंध में एक कथा प्रचलित है, कथा के अनुसार अपनी माता और पिता के अपमान का बदला लेने के लिए भगवान परशुराम ने सहस्त्रार्जुन की अक्षौहिणी सेना व उसके सौ पुत्रों के साथ ही उसका भी वध कर दिया। फिर 21 बार तक उन्होंने इस पृथ्वी की दुष्ट क्षत्रिय राजा के वंशजों का नाश कर डाला था।
 
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