पापांकुशा एकादशी व्रत कथा
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ऋषि की बात मानकर क्रोधन प्रसन्न हुआ और उन्हें प्रणाम करके अपने घर लौट गया। एकादशी तिथि आने पर उसने पूरी श्रद्धा से व्रत रखा, भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा की और रातभर जागरण किया। अगले दिन पारण करके उसने अपना व्रत पूरा किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु की कृपा से उसके पापों का अंत हुआ और मृत्यु के बाद उसे मोक्ष प्राप्त हुआ।
इस कथा के अनुसार, पापांकुशा एकादशी पर व्रत रखने के साथ जरूरतमंदों को अन्न, जल, छाता और तिल का दान करना भी पुण्यकारी माना जाता है। श्रद्धा और भक्ति के साथ इस व्रत का पालन करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
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