अक्तूबर 2026 में इन ग्रहों का होगा गोचर
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अक्तूबर 2026 में इन ग्रहों का होगा गोचर
शुक्र का गोचर और वक्री गति
अक्तूबर की शुरुआत में शुक्र अपनी स्वराशि तुला में विराजमान रहेंगे। 3 अक्तूबर को शुक्र इसी राशि में वक्री गति शुरू करेंगे। शुक्र का अपनी ही राशि में होना ज्योतिष की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। वक्री अवस्था में शुक्र के प्रभाव से प्रेम संबंध, वैवाहिक जीवन, सुख-सुविधाओं, कला और आर्थिक मामलों से जुड़े फैसलों में कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। इसके बाद 24 अक्तूबर को शुक्र चित्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, जिससे ग्रहों की स्थिति में एक और बदलाव आएगा।
सूर्य का तुला राशि में प्रवेश
17 अक्तूबर 2026 को सूर्य कन्या राशि से निकलकर तुला राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के तुला में आते ही वहां पहले से मौजूद शुक्र के साथ उनकी युति बनेगी। सूर्य और शुक्र की यह युति शुक्रादित्य योग का निर्माण करेगी। ज्योतिष में सूर्य को आत्मविश्वास, मान-सम्मान और नेतृत्व क्षमता का कारक माना जाता है, जबकि शुक्र सुख-सुविधा, कला, सौंदर्य और भौतिक समृद्धि से जुड़े हैं। ऐसे में इस युति को ज्योतिषीय दृष्टि से खास माना जा रहा है।
बुध का राशि परिवर्तन और वक्री होना
अक्तूबर में बुध भी राशि परिवर्तन करेंगे और तुला राशि में प्रवेश करेंगे। इसके बाद 24 अक्तूबर को बुध वक्री हो जाएंगे। बुध को बुद्धि, वाणी, तर्क, व्यापार और संचार का कारक ग्रह माना जाता है। ऐसे में बुध की वक्री चाल के दौरान बातचीत, कागजी कार्यों, व्यापारिक समझौतों और महत्वपूर्ण निर्णयों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। महीने के अंतिम दिनों में बुध और मंगल का संबंध भी बनेगा, जिससे ग्रहों की स्थिति और अधिक प्रभावशाली हो सकती है।
मंगल का कर्क राशि में गोचर
मंगल पूरे अक्तूबर कर्क राशि में रहेंगे। 17 अक्तूबर को मंगल आश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष में मंगल को साहस, ऊर्जा, भूमि, पराक्रम और उत्साह का कारक माना जाता है, जबकि कर्क राशि भावनाओं और संवेदनशीलता से जुड़ी है। ऐसे में मंगल की इस स्थिति को भावनात्मक और पारिवारिक मामलों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है। मंगल की स्थिति का प्रभाव व्यक्ति की कुंडली के अनुसार अलग-अलग देखने को मिल सकता है।
बृहस्पति का सिंह राशि में गोचर
अक्तूबर के अंतिम दिन यानी 31 अक्तूबर 2026 को देवगुरु बृहस्पति कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। गुरु का यह राशि परिवर्तन महीने के प्रमुख ग्रह गोचरों में शामिल रहेगा। बृहस्पति को ज्ञान, शिक्षा, संतान, धन, धर्म और विस्तार का कारक ग्रह माना जाता है। सिंह राशि में गुरु का प्रवेश कई राशियों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आ सकता है। इस गोचर का प्रभाव केवल व्यक्तिगत जीवन ही नहीं, बल्कि शिक्षा, करियर, आर्थिक स्थिति और सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों पर भी ज्योतिषीय दृष्टि से देखा जाता है।