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Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, नाराज हो सकते हैं भगवान विष्णु

Tue, 16 Jun 2026 08:55 AM IST
Shweta Singh धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे कठिन और अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना जाता है, जो भगवान विष्णु को समर्पित होता है। वर्ष 2026 में यह व्रत 25 जून को रखा जाएगा। इस दिन बिना जल और अन्न के उपवास रखा जाता है और विधि-विधान से पूजा, दान और भक्ति का विशेष महत्व होता है।
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Nirjala Ekadashi 2026 - फोटो : अमर उजाला
Nirjala Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी को सबसे कठिन और अत्यंत पुण्यदायी व्रतों में से एक माना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसमें बिना जल और अन्न ग्रहण किए उपवास रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा, व्रत और दान का फल कई गुना अधिक मिलता है। वर्ष 2026 में निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पावन दिन पर व्रत के नियमों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है, क्योंकि छोटी सी गलती भी व्रत के संपूर्ण पुण्य को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में श्रद्धालु इस दिन पूरी श्रद्धा, संयम और नियमों के साथ भगवान विष्णु की आराधना करते हैं।
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Nirjala Ekadashi 2026 - फोटो : अमर उजाला AI

निर्जला एकादशी का महत्व
मान्यता है कि महाभारत काल में भीमसेन ने महर्षि वेदव्यास के निर्देश पर यह कठिन व्रत किया था, जिससे इसका विशेष महत्व बढ़ गया। ऐसा माना जाता है कि निर्जला एकादशी का विधिपूर्वक पालन करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि आती है।

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जल का सेवन न करें - फोटो : AI Generated
जल का सेवन न करें
निर्जला एकादशी पर जल का सेवन नहीं किया जाता। यह व्रत बिना पानी के रखने की परंपरा है, इसलिए पूरे दिन और रात जल ग्रहण करने से बचना चाहिए। केवल कुल्ला किया जा सकता है, लेकिन पानी निगलना वर्जित माना गया है।

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अन्न और चावल का सेवन न करें - फोटो : Adobe stock
अन्न और चावल का सेवन न करें
इस दिन अन्न का सेवन पूरी तरह से निषिद्ध होता है, विशेष रूप से चावल खाने से बचना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से व्रत का पुण्य कम हो सकता है।
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तुलसी के पत्ते न तोड़ें - फोटो : Adobe Stock
तुलसी के पत्ते न तोड़ें
एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना अशुभ माना जाता है। पूजा के लिए तुलसी दल एक दिन पहले ही एकत्र कर लेना चाहिए, क्योंकि इस दिन तुलसी माता को विश्राम की स्थिति में माना जाता है।
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तामसिक भोजन और नशे से दूरी रखें - फोटो : freepik.com
तामसिक भोजन और नशे से दूरी रखें
इस दिन मांसाहार, लहसुन, प्याज, शराब और अन्य नशीले पदार्थों से पूरी तरह दूर रहना चाहिए। यह दिन शरीर और मन की शुद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
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क्रोध और नकारात्मक व्यवहार से बचें - फोटो : Freepik.com
क्रोध और नकारात्मक व्यवहार से बचें
व्रत के दौरान झूठ बोलना, गुस्सा करना, अपशब्द कहना या विवाद में पड़ना अशुभ माना जाता है। इस दिन मन को शांत रखकर भक्ति और सकारात्मकता बनाए रखना चाहिए।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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