फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Nirjala ekadashi 2021: सभी एकादशियों में सबसे कठोर और महत्वपूर्ण है ये एकादशी, पूजा विधि समेत ये है पूर्ण जानकारी

Thu, 17 Jun 2021 04:01 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

  • इस बार ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 21 जून 2021 दिन सोमवार पड़ रही है।
  • सभी एकादशियों में सबसे महत्वपूर्ण और कठिन होता है निर्जला एकादशी का व्रत
  • इस व्रत को करने से सभी एकादशियों के व्रत का फल प्राप्त हो जाता है।
विज्ञापन
1 of 4
निर्जला एकादशी 2021
सनातन धर्म में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। प्रत्येक माह में दोनों पक्षों शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की ग्याहरवीं तिथि एकादशी व्रत किया जाता है। इस तरह से एक माह में दो और पूरे वर्ष में 24 एकादशी तिथि होती हैं। प्रत्येक एकादशी में भगवान श्री हरि विष्णु का पूजन किया जाता है लेकिन सभी का अपना-अपना महत्व होता है। प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला यानी बिना पानी के व्रत किया जाता है। यह व्रत अत्यंत कठिन होने के साथ सभी एकादशियों में सबसे अधिक महात्म्य रखता है। इस बार ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 21 जून दिन सोमवार को पड़ रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत करने से वर्ष की सभी एकादशियों का फल प्राप्त हो जाता है। आइए जानते हैं कि कैसे रखा जाता है एकादशी का व्रत, क्या है शुभ मुहूर्त और पूजन विधि।
विज्ञापन

2 of 4
निर्जला एकादशी 2021 महत्व (प्रतीकात्मक तस्वीर)
निर्जला एकादशी महत्व
निर्जला एकादशी को भीमसेन एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। ऋषि वेदव्यास ने भीम को इस व्रत का महात्मय बताते हुए कहा था कि यदि तुम सभी एकादशी के व्रत नहीं कर सकते तो ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का व्रत करो, इससे तुम्हें सभी एकादशियों का फल प्राप्त हो जाएगा। तब वृकोदर भीम भी इस व्रत को करने के लिए सहमत हो गए इसलिए इस व्रत को पांडव एकादशी या फिर भीमसेन एकादशी भी कहा जाता है। निर्जला एकादशी का व्रत करने से मनुष्य इस लोक में सुख और यश की प्राप्ति करता है एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है।
विज्ञापन

3 of 4
निर्जला एकादशी 2021 शुभ मुहूर्त (प्रतीकात्मक तस्वीर)
निर्जला एकादशी शुभ मुहूर्त-
प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास की दशमी तिथि को गंगा दशहरा पड़ता है और इसके अगले दिन निर्जला एकादशी का व्रत किया जाता है। दशमी तिथि से ही एकादशी के नियम आरंभ हो जाते हैं। इस बार गंगा दशहरा 20 जून को मनाया जाएगा और इसके अगले दिन 21 जून को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाएगा। 

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि आरंभ- 20 जून 2021 दिन सोमवार को शाम 04 बजकर 21 मिनट से 

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि समाप्त- 21 जून दिन मंगलवार को दोपहर 01 बजकर 31 मिनट पर 

एकादशी व्रत पारण का शुभ मुहूर्त- 22 जून दिन बुधवार को सुबह 05 बजकर 24 मिनट से 08 बजकर 12 मिनट तक
विज्ञापन

4 of 4
निर्जला एकादशी 2021 पूजा विधि (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : lord vishnu (demo pic)
एकादशी तिथि व्रत विधि-
  • दशमी तिथि को सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही रात्रि में भूमि पर शयन करें।
  • एकादशी तिथि को ब्रह्ममुहूर्त में उठकर भगवान विष्णु का स्मरण करें।
  • इसके बाद पानी में गंगाजल की कुछ बूंदे डालकर स्नानादि करने के बाद व्रत का संकल्प करें।
  • यह दिन विष्णु जी का होता है इसलिए इस दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करना शुभ रहता है।
  • स्नान करने के पश्चात सर्वप्रथम सूर्य देव को जल अर्पित करें।
  • अब भगवान विष्णु के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें और धूप जलाकर दिखाएं।
  • अब पीले पुष्प, फल, अक्षत, दूर्वा और चंदन आदि से भगवान विष्णु का पूजा करें। 
  • तुलसी विष्णु जी को अति प्रिया है इसलिए पूजन में तुलसी दल अवश्य अर्पित करें। 
  • भगवान विष्णु के समक्ष 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें।
  • इसके बाद एकादशी व्रत का महात्म्य पढ़ें और आरती करें।
  • पूरे दिन निर्जला उपवास करने और रात्रि में जागरण कर भजन कीर्तन करने का विधान है।
द्वादशी तिथि को प्रातः जल्दी घर की साफ-सफाई करें और स्नानादि करके भगवान विष्णु की पूजा करें और उन्हें भोग लगाएं। इसके बाद किसी जरुरतमंद या ब्राह्मण को भोजन कराएं एवं शुभ मुहूर्त में स्वयं भी व्रत का पारण करें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें