कैंची धाम का नाम 'कैंची' क्यों पड़ा
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3. भगवान हनुमान के थे अनन्य भक्त
बाबा नीम करौली भगवान हनुमान के परम भक्त थे। उनके अनुयायियों में उन्हें हनुमान जी का अंश या अवतार मानने की परंपरा भी रही है। कैंची धाम में भगवान हनुमान का मंदिर उनकी इसी भक्ति परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
4. वह हमेशा कंबल क्यों ओढ़ते थे?
बाबा की तस्वीरों में उन्हें अक्सर कंबल ओढ़े हुए देखा जाता है और यही उनकी पहचान का हिस्सा बन गया। उनके कंबल को लेकर कई तरह की बातें कही जाती हैं, लेकिन इसका कोई एक प्रमाणित कारण उपलब्ध नहीं है। कुछ अनुयायी इसे उनकी सादगी और वैराग्य का प्रतीक मानते हैं। बाबा अपने पहनावे को लेकर दिखावे से दूर रहते थे और साधारण कंबल में ही नजर आते थे। इसलिए कंबल धीरे-धीरे उनके व्यक्तित्व की पहचान बन गया।
5. कैंची धाम का नाम 'कैंची' क्यों पड़ा?
उत्तराखंड में नैनीताल-अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित कैंची धाम का नाम सुनकर अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर इसका कैंची से क्या संबंध है। स्थानीय जानकारी के अनुसार, यहां सड़क के दो तीखे हेयरपिन मोड़ कैंची की आकृति जैसे दिखाई देते हैं। इसी वजह से इस स्थान को कैंची धाम कहा गया, जहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।