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Navratri 2026: क्या बिना व्रत रखे कर सकते हैं कन्या पूजन? जानें पूजा की विधि और जरूरी नियम

Wed, 14 Oct 2026 02:54 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्व है, लेकिन क्या इसके लिए नौ दिनों का व्रत रखना जरूरी है? जानें बिना उपवास के महाअष्टमी या महानवमी पर कन्या पूजन कर सकते हैं या नहीं और क्या हैं इससे जुड़े धार्मिक नियम।
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कन्या पूजन - फोटो : amar ujala
नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के साथ कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। इस दौरान भक्त अष्टमी या नवमी तिथि पर छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा करते हैं और उन्हें भोजन कराते हैं। लेकिन कई लोगों के मन में सवाल रहता है कि अगर उन्होंने नवरात्रि के नौ दिनों तक व्रत नहीं रखा है, तो क्या वे कन्या पूजन कर सकते हैं? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बिना उपवास रखे भी कन्या पूजन किया जा सकता है। इसके लिए श्रद्धा, स्वच्छता और कन्याओं के प्रति सम्मान का भाव महत्वपूर्ण माना जाता है।
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धार्मिक परंपराओं और परिवार की मान्यताओं के अनुसार पूजा की विधि में कुछ अंतर हो सकता है।
क्या बिना व्रत रखे कन्या पूजन करना सही है?
हिंदू परंपरा में कन्या पूजन को मां दुर्गा के प्रति भक्ति और सम्मान प्रकट करने का एक विशेष माध्यम माना जाता है। नवरात्रि में व्रत रखने वाले भक्त आमतौर पर अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन करके अपने व्रत का पारण करते हैं। हालांकि, व्रत नहीं रखने वाले लोग भी इन तिथियों पर देवी की पूजा कर सकते हैं और कन्याओं को भोजन करा सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति स्वास्थ्य संबंधी परेशानी, व्यस्तता या किसी अन्य कारण से उपवास नहीं रख पाता है, तो वह अपनी श्रद्धा के अनुसार कन्या पूजन कर सकता है। धार्मिक परंपराओं और परिवार की मान्यताओं के अनुसार पूजा की विधि में कुछ अंतर हो सकता है।
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मां दुर्गा को फूल, फल, धूप और दीप अर्पित करके विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें। - फोटो : अमर उजाला
कन्या पूजन की सही विधि क्या है?
  • कन्या पूजन के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल की साफ-सफाई करें।
  • मां दुर्गा को फूल, फल, धूप और दीप अर्पित करके विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें।
  • परंपरा के अनुसार, दो से दस वर्ष तक की कन्याओं को कन्या पूजन के लिए आमंत्रित करें।
  • कई परिवार कन्याओं के साथ एक बालक को बटुक भैरव का प्रतीक मानकर पूजन में शामिल करते हैं।
  • घर आई कन्याओं का आदरपूर्वक स्वागत करें। परंपरा के अनुसार, उनके पैर धोएं, तिलक लगाएं और उन्हें साफ आसन पर बैठाएं।
  • कन्याओं को हलवा, पूरी और काले चने जैसे पारंपरिक सात्विक व्यंजन प्रेमपूर्वक परोसें।
  • भोजन के बाद कन्याओं को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा या उपहार दें और सम्मानपूर्वक विदा करें।

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महाअष्टमी और महानवमी पर कब करें कन्या पूजन? - फोटो : adobe stock
महाअष्टमी और महानवमी पर कब करें कन्या पूजन?
शारदीय नवरात्रि में कन्या पूजन मुख्य रूप से महाअष्टमी और महानवमी पर किया जाता है। वर्ष 2026 में महाअष्टमी 19 अक्टूबर और महानवमी 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। भक्त अपनी पारिवारिक परंपरा और तिथि के अनुसार इनमें से किसी एक दिन कन्या पूजन कर सकते हैं। पूजा का समय निर्धारित करते समय स्थानीय पंचांग और तिथि के अनुसार शुभ मुहूर्त देखना उचित रहता है। यदि आपके परिवार में किसी विशेष विधि से अष्टमी या नवमी का पूजन करने की परंपरा है, तो उसका पालन भी किया जा सकता है।
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कन्या पूजन करते समय किन बातों का ध्यान रखें
कन्या पूजन करते समय किन बातों का ध्यान रखें?
कन्या पूजन में स्वच्छता और कन्याओं के सम्मान का विशेष ध्यान रखें। भोजन ताजा और सात्विक होना चाहिए। कन्याओं को अपनी सामर्थ्य के अनुसार भोजन और उपहार दें। किसी तरह का दिखावा या अनावश्यक खर्च करना जरूरी नहीं है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कन्याओं के साथ प्रेम और सम्मान से व्यवहार करें। धार्मिक आस्था में पूजा का महत्व केवल रस्मों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके पीछे छिपे भाव और अच्छे आचरण को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस प्रकार, नवरात्रि में व्रत न रखने वाले लोग भी अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार कन्या पूजन कर सकते हैं। मां दुर्गा की आराधना के साथ कन्याओं का आदर-सत्कार करना इस परंपरा का प्रमुख उद्देश्य माना जाता है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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