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Navratri 2019: नवरात्रि के 9 दिन और 9 देवियां

Thu, 19 Sep 2019 12:36 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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मां सभी रूपों में प्रत्यक्ष है और सभी नाम ग्रहण करती है। माँ दुर्गा के नौ रूप है और हर रूप में एक दैवीय शक्ति है। इन नौ रूपों की पूजा-अर्चना करना ही नवरात्रि मनाना है। बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक पर्व दशहरा मनाने के साथ ही असीम आनन्द और हर्षोल्लास के साथ नवरात्रि पर्व का समापन होता है।


  





 
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मां शैलपुत्री
शैलपुत्री

नवरात्रि के नौ दिनों में माँ दुर्गा के स्वरूपों का सम्मान किया जाता है और पूजा-अर्चना की जाती है। माँ दुर्गा का पहला स्वरुप शैलपुत्री है। शैल का मतलब होता है शिखर। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार देवी शैलपुत्री कैलाश पर्वत की पुत्री है इसलिए देवी शैलपुत्री को पर्वत की बेटी भी कहा जाता है। मां के इस रूप का वास्तविक अर्थ है- चेतना का सर्वोच्चतम स्थान।

 
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maa Brahmacharini - फोटो : maa Brahmacharini
ब्रह्मचारिणी

ब्रह्मचारिणी का अर्थ है वह जो असीम, अनन्त में विद्यमान, गतिमान है। एक ऊर्जा है जो अनन्त में विचरण करती है। देवी माँ असीमित, अनन्त हैं इनकी कोई सीमाएं नहीं है। ब्रह्मचारिणी सर्वव्यापक चेतना है। जिसका कोई आदि या अंत न हो, वह सर्वव्याप्त, सर्वश्रेष्ठ है और उसके पार कुछ भी नहीं।

 

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देवी चंद्रघंटा - फोटो : SELF
चन्द्रघंटा

मां के यह दैवीय रूप दुःख, विपत्ति, भूख और यहाँ तक कि शांति में भी मौजूद है। इस रूप का अर्थ यही है कि सबको साथ लेकर चलना चाहिए, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हो। नाम के प्रथम में जो चंद्र लगता है उसका तात्पर्य ही हमारे मन का प्रतीक है।

 
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मां कूष्मांडा - फोटो : self
कूष्माण्डा

मां के इस स्वरुप का अर्थ प्राणशक्ति से है। वह प्राणशक्ति जो पूर्ण एक गोलाकार वृत्त की तरह है। इसका अर्थ यह भी है, कि देवी मां सदैव हमारे अंदर प्राणशक्ति के रूप में प्रकट रहती हैं। ऊर्जा या चेतना में सूक्ष्म से सूक्ष्मतम होने की और विशाल से विशालतम होने का गुण होता है।सर्वव्यापी, जागृत, प्रत्यक्ष बुद्धिमत्ता का सृष्टि में अनुभव ही कूष्माण्डा है।
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skandmata
स्कंदमाता

बुद्धिमता, ज्ञान की देवी हैं मां स्कंदमाता। यह दैवीय शक्ति व्यवहारिक ज्ञान को सामने लाती है। धार्मिक शास्त्रों अनुसार भगवान कार्तिकेय का एक नाम स्कन्द भी है जो ज्ञानशक्ति और कर्मशक्ति के एक साथ सूचक है। स्कंद इन्हीं दोनों का मिश्रण है। स्कंद व्यवहारिक ज्ञान और क्रिया के साथ में होने का प्रतीक है। जब कर्म व्यवहारिक ज्ञान से लिप्त हो जाता है तब स्कंद तत्व का उदय होता है और देवी दुर्गा स्कंद तत्व की माता हैं।

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katyayani
कात्यायनी

माँ कात्यायनी दिव्यता के गुप्त रहस्यों की प्रतीक हैं। जो अदृश्य, अव्यक्त है, उसकी सत्ता देवी कात्यायनी द्वारा चलाई जाती है। अपने इस रूप में वह जो अदृश्य या समझ के परे हैं, उनकी सूचक है। माँ कात्यायनी का प्रतीक सकारात्मक क्रोध है। जो अज्ञान, अन्याय के प्रति है। वह क्रोध के उस रूप का प्रतीक हैं जो सृष्टि में सृजनता, सत्य और धर्म की स्थापना करती हैं।यह रूप जगत में नकारात्मकता का विनाश कर धर्म की स्थापना करता है। माँ कात्यायनी क्रोध का वो रूप है, जो नकारात्मकता को समाप्त कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। 

 

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कालरात्रि देवी - फोटो : kaalratri devi
कालरात्रि

मां का यह स्वरूप अति भयावह और उग्र है। सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में इस रूप से अधिक भयावह और कुछ नहीं। इसके बावजूद भी यह रूप मातृत्व को समर्पित है। यह रूप ज्ञान और वैराग्य प्रदान करता है।

 

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मां महागौरी - फोटो : SELF
महागौरी

वह रूप जो सौन्दर्य से परिपूर्ण है, प्रकाशमान हैँ, वही मां का 8 वां स्वरुप महागौरी का है। मां  महागौरी करुणामयी हैं, सबको आशीर्वाद देती है। यह वो रूप है, जो सभी मनोकामनाओं को पूरा करता है। यह भौतिक नहीं, बल्कि लोक से परे आलौकिक रूप है। भौतिक जगत में प्रगति का  आशीर्वाद देवी महागौरी से ही मिलता हैं। 

 
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मां सिद्धिदात्री - फोटो : SELF
सिद्धिदात्री

माँ सिद्धिदात्री जीवन में सिद्धि, क्षमता प्रदान करती हैं जिससे सभी कार्य सबकुछ पूर्णता के साथ हो सके। बिना किसी कार्य किये आपकी इच्छा का पूर्ण हो जाना यही सिद्धि है। सिद्धि जीवन के हर स्तर में सम्पूर्णता प्रदान करती है। देवी सिद्धिदात्री की यही महत्ता है।
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