10 अक्टूबर से शक्ति आराधना का पर्व प्रारंभ होने जा रहा है। नौ दिनों तक देवी दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की साधना के लिए देश के तमाम शक्तिपीठों पर साधकों की भीड़ जुटती है। पुराणों के अनुसार जहां-जहां पर सती के अंग, उनके आभूषण और वस्त्र गिरे वह शक्तिपीठ कहलाए जाने लगे। हिंदू धर्म ग्रन्थों में देवी के 51 शक्ति पीठ बताए गए हैं। लेकिन इन 51 शक्तिपीठों में से 4 ऐसे भी हैं जिनके बारे में आज भी खोज जारी है। आइए जानते हैं, देवी के इन 4 शक्तिपीठों के बारे में...
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navratri 2018
रत्नावली शक्तिपीठ
ऐसी मान्यता है कि इस शक्तिपीठ में देवी मां का कंधा गिरा था। इस शक्तिपीठ के बारे में भक्तों का मानना है कि देवी का यह अंग चेन्नई के आस-पास इलाकों में गिरा है। लेकिन इस जगह के बारे में आज तक किसी को मालूम नहीं है।
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कालमाधव शक्तिपीठ
इस पावन शक्तिपीठ के बारे में मान्यता है कि यहां पर देवी सती के बायां कूल्हा गिरा था। इस शक्तिपीठ को भी अभी तक कोई नहीं खोज पाया है। मान्यता है कि इस शक्तिपीठ पर देवी सती कालमाधव और शिव असितानंद नाम से विराजित हैं।
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लंका शक्तिपीठ
मान्यता है कि इस पावन स्थान पर देवी सती का विशेष आभूषण गिरा था। शास्त्रों में इस शक्तिपीठ के बारे में उल्लेख मिलता है। इस स्थान के बारे में भी आज तक कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
पंचसागर शक्तिपीठ
शक्ति का चौथा ऐसा पीठ जिसके बारे में आज तक कोई पता नहीं लगा पाया है, वह पंचसागर शक्तिपीठ है। मान्यता है कि इस जगह पर सती का निचला जबड़ा गिरा था। इस स्थान पर देवी सती को वरही कहा जाता है।