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Narsingh jayanti 2021: कल है नृसिंह जयंती, जानिए कैसे भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने लिया नृसिंह अवतार

Mon, 24 May 2021 08:11 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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नृसिंह जयंती 2021
वैशाख मास में शुक्लपक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा करने के लिए नृसिंह अवतार लिया था। इस दिन को नृसिंह जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस बार नृसिंह जयंती 25 मई 2021 यानी कल मनाई जाएगी। भगवान नृसिंह विष्णु जी के चौथे अवतार हैं। इनका आधा शरीर मनुष्य और आधा सिंह का है इसलिए इन्हें नृसिंह कहा जाता है। इनकी पूजा अर्चना करने से भक्त को सभी संकटों से मुक्ति मिलती है। जानते हैं कि कैसे हुआ भगवान नृसिंह का अवतरण।
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नृसिंह जयंती 2021
पौराणिक ग्रंथों में मिलने वाली कथाओं के अनुसार एक समय कश्यप नामक ऋषि थे, राजा दक्ष ने अपनी दो पुत्रियों अदिति और दिति का विवाह उनके साथ किया था। दिति के गर्भ से उनके दो पुत्र हुए, जिनमें से एक का नाम हरिण्याक्ष तथा दूसरे का हिरण्यकश्यप था। पृथ्वी की रक्षा के हेतु भगवान विष्णु ने वराह अवतार में हिरण्याक्ष को मार दिया था। अपने भाई की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिए हिरण्यकश्यप ने ब्रह्माजी की कठोर तपस्या करके अजेय होने का वरदान प्राप्त कर लिया। उसने वरदान मांग लिया कि वह न उसे कोई मनुष्य और न ही कोई पशु मार पाए। उसकी मृत्यु न दिन हो और न रात में, वह न जल में न थल में मारा जाए। वरदान प्राप्त होने के बाद ने स्वर्ग पर भी अधिकार कर लिया। वह अपनी प्रजा पर भी अत्याचार करने लगा।
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नृसिंह जयंती 2021
इसी दौरान हिरण्यकश्यपु की पत्नी कयाधु के गर्भ से एक पुत्र का जन्म हुआ, जिसका नाम प्रहलाद रखा गया। एक राक्षस कुल में जन्म लेने के बाद भी प्रहलाद भगवान नारायण का परम भक्त था। वह सदैव हरि का नाम जपता रहता था और भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहता था। वह सदा अपने पिता द्वारा किए जा अत्याचारों का विरोध करता था। हिरण्यकश्यप को प्रहलाद का विष्णु की भक्ति में लीन रहना कतई पसंद नहीं था। उसने नारायण भक्ति से हटाने के लिए कई प्रयास किए परंतु भक्त प्रहलाद के व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। जिसके बाद हिरण्याकश्यप ने अत्याचार करने आरंभ कर दिए। कई बार प्रहलाद को मारने के प्रयास किए गए परंतु भगवान विष्णु सदैव अपने भक्त को बचा लेते थे। प्रहलाद अपने पथ से विचलित नहीं हुआ। वह अपने पिता को सदा यही कहता था कि आप मुझ पर कितना भी अत्याचार कर लें मुझे नारायण हर बार बचा लेंगे। इन बातों से क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने उसे अपनी बहन होलिका की गोद में बैठाकर जिंदा जलाने का प्रयास किया। होलिका को वरदान था कि अग्नि उसे जला नहीं सकती थी। लेकिन जब प्रहलाद को होलिका की गोद में बिठा कर अग्नि में बैठी तो उसमें होलिका तो जलकर राख हो गई लेकिन प्रहलाद बच गए।
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नृसिंह जयंती 2021
इस घटना के बाद हिरण्यकश्यप को अत्यधिक क्रोध आ गया। एक दिन हिरण्यकश्यप ने कहा कि तू नारायण नारायण करता फिरता है, बता कहां है तेरा नारायण। प्रहलाद ने जवाब दिया पिताजी मेरे नारायण इस सृष्टि के कण कण में व्याप्त हैं। क्रोधित हिरण्यकश्यपु ने कहा कि'क्या तेरा भगवान इस खंभे में भी है? प्रह्लाद के हां कहते ही हिरण्यकश्यपु ने खंभे पर प्रहार कर दिया तभी खंभे को चीरकर भगवान विष्णु आधे शेर और आधे मनुष्य रूप में नृसिंह अवतार लेकर प्रकट हुए। उस समय न दिन का समय था न रात का वह दोनों बेला के मिलन का समय था। उन्होंने न हिरण्यकश्यप को न जल में मारा न थल में, उन्होंने अपनी गोद में लेकर हिरण्यकश्यपु का वध किया। न ही उन्होंने घर के भीतर और न बाहर न अस्त्र से न शस्त्र से बल्कि चौखट के बीचो-बीच अपने नाखूनों से हिरण्यकश्यप का वध किया। इस तरह से भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा भी की और ब्रह्माजी के वरदान मान भी रखा।
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