नृसिंह जयंती 2021
पौराणिक ग्रंथों में मिलने वाली कथाओं के अनुसार एक समय कश्यप नामक ऋषि थे, राजा दक्ष ने अपनी दो पुत्रियों अदिति और दिति का विवाह उनके साथ किया था। दिति के गर्भ से उनके दो पुत्र हुए, जिनमें से एक का नाम हरिण्याक्ष तथा दूसरे का हिरण्यकश्यप था। पृथ्वी की रक्षा के हेतु भगवान विष्णु ने वराह अवतार में हिरण्याक्ष को मार दिया था। अपने भाई की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिए हिरण्यकश्यप ने ब्रह्माजी की कठोर तपस्या करके अजेय होने का वरदान प्राप्त कर लिया। उसने वरदान मांग लिया कि वह न उसे कोई मनुष्य और न ही कोई पशु मार पाए। उसकी मृत्यु न दिन हो और न रात में, वह न जल में न थल में मारा जाए। वरदान प्राप्त होने के बाद ने स्वर्ग पर भी अधिकार कर लिया। वह अपनी प्रजा पर भी अत्याचार करने लगा।