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Nag Panchami 2020: कुंडली में कालसर्प दोष को दूर करने के लिए नागपंचमी पर जरूर करें ये उपाय

Fri, 17 Jul 2020 01:00 PM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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कुंडली में कालसर्प दोष निवारण उपाय - फोटो : अमर उजाला
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कालसर्प दोष निवारण के लिए नागपंचमी के दिन को सर्वोत्तम माना गया है क्योंकि इस दिन नागो की पूजा का विधान है। इसलिए इस दिन कालसर्प दोष वालों को चांदी का नाग-नागिन का जोड़ा भगवान शिव को अर्पित करने को कहा जाता है इससे कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। ज्योतिष अनुसार जिस व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प योग होता है उसे अपने जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कुंडली में कुल बारह प्रकार के कालसर्प दोष बताए गए हैं।

 

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कुलिक कालसर्प योग

  • यदि कुंडली में राहु धन भाव में एवं केतु अष्टम में हो तो कुलिक कालसर्प योग यह योग बनता है, जिसकी कुंडली में यह योग होता है उसे पुत्र,जीवन साथी एवं पिता सुख की कमी रहती है, इस दोष के कारण व्यक्ति को हर कदम पर अपमान सहना पड़ सकता है।

वासुकी कालसर्प योग

  • यदि जिस जातक की कुंडली में तृतीय भाव में राहु एवं नवम भाव में केतु हो और सारे ग्रह इनके मध्य में हो तो ऐसे जातकों की कुंडली मेें वासुकी कालसर्प दोष का योग बनता है। इस योग के कारण व्यक्ति के भाग्योदय में बाधा आती नौकरी और कार्य क्षेत्र में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। भाई बहनों को कष्ट रहता है।

 

शंखपाल कालसर्प योग

  • जब राहु नवम् भाव में एवं केतु तृतीय में हो तो कुंजली में शंखपाल कालसर्प योग बनता है। इस योग के कारण नौकरी में परेशानियां बनी रहती हैं। एवं पिता का सुख नहीं मिलता है।

 

पद्म कालसर्प योग

  • जिसकी कुंडली में पद्म कालसर्प दोष होता है उसको संतान सुख से वंचित रहना पड़ सकता है। साथ ही शत्रु बाधा भी बनी रहती है। पंचम भाव में राहु एवं एकादश भाव में केतु होने से यह योग बनता है।

महापद्म कालसर्प योग

  • जब राहु छठें भाव में एवं केतु व्यय भाव में आ जाए तो महापद्म कालसर्प योग बनता है। कुंडली में यह योग की वजह से पत्नी कष्ट, आय में कमी, अपमान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

तक्षक कालसर्प योग

  • यदि राहु सप्तम में एवं केतु लग्न में हो तो तक्षक कालसर्प योग बनता है,ऐसे जातक की पैतृक संपत्ति नष्ट हो जाती है, बार-बार जेल जाना पड़ सकता है, एवं व्यर्थ ही कोर्ट कचहरी के चक्कर काटने पड़ते हैं।

 

कर्कोटक कालसर्प योग

  • अगर कुंडली में राहु अष्टम भाव में और केतु धन भाव में हो, तो कर्कोटक कालसर्प योग बनता है। इस योग के कारण व्यक्ति का भाग्योदय नहीं हो पाता, बेरोजगारी का सामना करना पड़ता है। व्यापार में हानि उठानी पड़ती है।

शंखचूड़ कालसर्प योग

  • यदि राहु सुख भाव में हो और केतु कर्म भाव में हो तो ऐसे जातको की कुंडली में शंखचूड़ कालसर्प योग बनता है। ऐसे जातकों को व्यवसाय में अक्सर उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है।

 

घातक कालसर्प योग

  • घातक कालसर्प योग तब बनता है, जब राहु दशम एवं केतु सुख भाव में हो, और जिसकी कुंडली में यह योग बनता है,उसे हमेशा संतान के रोग की वजह से परेशान रहना पड़ता है।

 

विषधर कालसर्प योग

  • जिन जातको की कुंडली में राहु लाभ भाव में एवं केतु पुत्र भाव में हो, ऐसे जातको की कुंडली में विषधर कालसर्प योग बनता है। इस योग के कारण जातक को किसी न किसी कारण घर से दूर रहना पड़ता है। ऐसे लोग हृदय रोग से पीड़ीत भी हो जाते हैं।

 

शेषनाग कालसर्प योग

  • यदि राहु व्यय भाव में एवं केतु रोग भाव में हो, तो कुंडली में शेषनाग कालसर्पयोग बनता है। ऐसे जातक शत्रु बाधा से पीड़ित रहते हैं,जिसके कारण उन्हें बार-बार न्यायालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

 

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अनंत कालसर्प योग
  • जिसकी लग्न में राहु और सप्तम में केतु हो,उसकी कुंडली में अनंत कालसर्प योग बनता है। इस योग के कारण जातक कभी शांति नहीं मिलती है उसे किसी न किसी कारणवश और षड़यंत्रों में फंसने की वजह से कोर्ट-कचहरी का चक्कर लगाने पड़ते हैं।
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