फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mokshada Ekadashi 2025: भद्रा और पंचक के बीच कैसे करें एकादशी की पूजा? जानें मुहूर्त, उपाय और पारण समय

Fri, 21 Nov 2025 12:12 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Mokshada Ekadashi 2025 Bhadra Time: मोक्षदा एकादशी 2025 में भद्रा और पंचक का संयोग है। जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, उपाय, भद्रा-पंचक समय और पारण का सही तरीका।
विज्ञापन
1 of 6
मोक्षदा एकादशी 2025 - फोटो : amar ujala
Mokshada Ekadashi Date: मोक्षदा एकादशी हिन्दू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी और कल्याणकारी व्रत माना जाता है। यह व्रत मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है और पितरों तथा जीवात्माओं के कष्ट दूर होते हैं। मोक्ष प्रदान करने वाली इस एकादशी को विशेष रूप से पापों के नाश और आध्यात्मिक उन्नति के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
2026 में बृहस्पति का बड़ा परिवर्तन, बनेगा शक्तिशाली राजयोग, इन राशियों की चमकेगी किस्मत
मोक्षदा एकादशी 2025 में शुभ योग, भद्रा और पंचक के संयोग के बीच पढ़ रही है, ऐसे में भक्तों के मन में कई प्रकार के प्रश्न उत्पन्न हो रहे हैं भद्रा कब तक रहेगी, पंचक का समय क्या है, और ऐसे योग में पूजा कैसे करनी चाहिए? इस शुभ व्रत से जुड़ी पूजा विधि, मुहूर्त, उपाय और पारण समय की पूरी जानकारी हम इस लेख में विस्तार से प्रस्तुत कर रहे हैं, ताकि आप इस एकादशी का पूर्ण फल प्राप्त कर सकें।
शुक्र के विशेष गोचर से बनेगा लक्ष्मी नारायण योग, इन राशियों को मिलेगी मनचाही नौकरी और तरक्की
विज्ञापन

2 of 6
दृक पंचांग के अनुसार, मोक्षदा एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। - फोटो : Adobe Stock
मोक्षदा एकादशी 2025 कब है?
दृक पंचांग के अनुसार, मोक्षदा एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। वर्ष 2025 में एकादशी तिथि 30 नवंबर, रविवार रात 09:29 बजे शुरू होगी और 1 दिसंबर, सोमवार शाम 07:01 बजे समाप्त होगी। चूंकि व्रत हमेशा उदया तिथि के आधार पर रखा जाता है, इसलिए मोक्षदा एकादशी का व्रत 1 दिसंबर 2025, सोमवार को रखा जाएगा।
विज्ञापन

3 of 6
मोक्षदा एकादशी की पूजा का सर्वश्रेष्ठ अमृत मुहूर्त सुबह 06:56 से 08:15 बजे तक रहेगा। - फोटो : Adobe Stock
मोक्षदा एकादशी योग और शुभ मुहूर्त
मोक्षदा एकादशी 2025 के दिन कई शुभ योग बन रहे हैं। इस तिथि पर पहले व्यतीपात योग रहेगा, जिसके समाप्त होने के बाद वरीयान योग प्रारंभ होगा। इसके साथ ही इस एकादशी पर रेवती नक्षत्र का प्रभाव रहेगा और बाद में अश्विनी नक्षत्र का आरंभ होगा। पूजा-अर्चना के लिए इस दिन खास शुभ मुहूर्त भी बन रहे हैं। मोक्षदा एकादशी की पूजा का सर्वश्रेष्ठ अमृत मुहूर्त सुबह 06:56 से 08:15 बजे तक रहेगा। इसके अतिरिक्त भक्त सुबह 09:33 से 10:52 बजे के बीच शुभ-उत्तम मुहूर्त में भी भगवान विष्णु की आराधना कर सकते हैं।

4 of 6
भद्रा और पंचक में पड़ रही है मोक्षदा एकादशी 2025भद्रा और पंचक में पड़ रही है मोक्षदा एकादशी - फोटो : Adobe Stock
भद्रा और पंचक में पड़ रही है मोक्षदा एकादशी 2025
इस वर्ष मोक्षदा एकादशी पर भद्रा और पंचक दोनों का संयोग बन रहा है। भद्रा का प्रभाव सुबह 8:20 बजे से शाम 7:01 बजे तक रहेगा और इस अवधि में भद्रा का वास पृथ्वी लोक पर होगा। इसलिए इस दौरान किसी भी शुभ कार्य को करने से बचने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही पंचक भी इस दिन सुबह 6:56 बजे से रात 11:18 बजे तक रहेगा। चूंकि यह भद्रा गुरुवार से शुरू हो रही है, इसलिए इसका प्रभाव उतना अशुभ नहीं माना जाता।
विज्ञापन

5 of 6
मोक्षदा एकादशी पारण समय - फोटो : Adobe Stock
मोक्षदा एकादशी पारण समय
मोक्षदा एकादशी का व्रत 1 दिसंबर 2025 को रखा जाएगा और पारण अगले दिन 2 दिसंबर को किया जाएगा। पारण का शुभ समय सुबह 6:57 बजे से 9:03 बजे तक रहेगा। द्वादशी तिथि इस दिन दोपहर 3:57 बजे समाप्त होगी, इसलिए पारण इसी अवधि में करना उत्तम रहेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
मोक्षदा एकादशी के सरल दीपक उपाय - फोटो : Adobe Stock
मोक्षदा एकादशी के सरल दीपक उपाय
  • शाम के समय तुलसी के पास शुद्ध घी का दीपक जलाने से मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है और घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है।
  • पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
  • घर के मुख्य द्वार पर दोनों ओर घी के दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का वातावरण बनता है।
  • पूजा के दौरान भगवान विष्णु के सामने 11 दीपक जलाकर विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से कष्टों का नाश होता है।
  • शाम के समय जलते दीपक में पीली सरसों डालकर उसे पूजा स्थान पर रखने से आर्थिक समस्याएँ दूर होती हैं और दरिद्रता नहीं आती।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें